विश्व आदिवासी दिवस: भारत में आदिवासियों की स्थिति क्यों नहीं है बेहतर?

सरकार के तमाम दावों, योजनाओं, आरक्षण और सुविधाओं के बावजूद आदिवासी क्षेत्रों में आदिवासी उपेक्षित है। आदिवासी समुदाय के लोगों की आर्थिक स्थिति खऱाब है। उनके ज...

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आदिवासी विकास, नेतृत्व और छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ अपनी स्थापना का रजत जयंती मनाने जा रहा है। 1 नवंबर 2000 को मध्यप्रदेश से पृथक होकर स्वतंत्र राज्य के रूप में अस्तित्व में आने वाले छत्तीसगढ़ ने विका...

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न्यायिक प्रक्रिया में मानसिक स्वास्थ्य की भूमिका

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने हाल ही में एक चौंकाने वाला फैसला सुनाया, जिसमें एक 25 वर्षीय व्यक्ति को अपने पिता और दादी की हत्या के आरोप से बरी कर दिया गया। ट्रायल को...

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देशभक्ति की कसौटी या जिम्मेदारी की याद?

Editor-in-Chief सुभाष मिश्र की कलम से – देशभक्ति की कसौटी या जिम्मेदारी की याद?

-सुभाष मिश्रसुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी सीधे तौर पर राहुल गांधी की देशभक्ति पर सवाल नहीं उठाती, बल्कि एक विपक्षी नेता के रूप में उनकी जिम्मेदारी पर जोर देती ह...

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प्रभावशाली व्यक्तियों द्वारा यौन अपराध और समाज की जिम्मेदारी

सत्ता की अंधी दौड़: प्रभावशाली व्यक्तियों द्वारा यौन अपराध और समाज की जिम्मेदारी

कर्नाटक के पूर्व सांसद प्रज्वल रेवन्ना को बलात्कार के एक मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। यह फैसला बेंगलुरु की विशेष अदालत ने दिया, जहां रेवन्ना पर...

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अंधविश्वास की बलि चढ़ती मासूमियत

Editor-in-Chief सुभाष मिश्र की कलम से-अंधविश्वास की बलि चढ़ती मासूमियत

-सुभाष मिश्रभारत एक ऐसा देश है जहां प्रगति और पतन एक साथ सांस लेते हैं। एक ओर हम चंद्रमा और मंगल पर पहुंच रहे ह...

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Editor-in-Chief सुभाष मिश्र की कलम से - पानी में डूबता, पानी को तरसता देश

Editor-in-Chief सुभाष मिश्र की कलम से – पानी में डूबता, पानी को तरसता देश

-सुभाष मिश्रभारत, जहां नदियां जीवन की धारा मानी जाती हैं, आज एक विरोधाभासी जल संकट से गुजर रहा है। एक ओर करोड़ो...

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Editor-in-Chief सुभाष मिश्र की कलम से - भारत में अश्लीलता का बढ़ता बाजार

Editor-in-Chief सुभाष मिश्र की कलम से – भारत में अश्लीलता का बढ़ता बाजार

-सुभाष मिश्रअश्लीलता के पक्षधर एक तर्क दिया करते हैं कि जहां बहुत वर्जनाएं होती हैं, सेक्स को लेकर परहेज पाला ज...

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Editor-in-Chief सुभाष मिश्र की कलम से - बिना रीढ़ का सरकारी तंत्र

Editor-in-Chief सुभाष मिश्र की कलम से – बिना रीढ़ का सरकारी तंत्र

-सुभाष मिश्रजब सरकारी तंत्र कहा जाता है तो इसका आशय उस पूरी सरकारी व्यवस्था से है जो शासन...

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