शर्म करो… क्यों एक लेखक के पीछे पड़े हो?

ध्रुव शुक्लहिन्दी के प्रतिष्ठित कवि-कथाकार श्री विनोद कुमार शुक्ल को उनके उपन्यास -----' ...

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नवरात्रि गरबा में चढ़ा हिंदू-मुस्लिम रंग

-सुभाष मिश्रनवरात्रि के आगमन पर गरबा की थापें फिर चौक-चौराहों में गूंजने लगती है। यह पर्व न केवल मां दुर्गा की ...

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पारदर्शिता लाने कॉपीराइट कानून में प्रावधान हो

विनोदकुमार शुक्ल को हिन्दयुग्म प्रकाशन द्वारा दी गयी 30 लाख रुपए की रॉयल्टी को लेकर सोशल मीडिया पर हुई बहस में लेखक-प्रकाशक संबंधों को लेकर गहराई से बात नहीं ...

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हिन्दी के लेखकों को प्रकाशकों से हिसाब मांगना चाहिए

सुभाष मिश्र( विनोद कुमार शुक्ल और 30 लाख की रायल्टी प्रसंग)

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प्रकाशक शेर, लेखक शिकार

-सुभाष मिश्ररायपुर में आयोजित हिन्द युग्म उत्सव में प्रख्यात कवि-कथाकार विनोद कुमार शुक्ल को उनकी चार पुस्तकों की रॉयल्टी के रूप में तीस लाख की रकम का चेक भें...

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साहित्य के ज़रिए राजनीतिक जमीन तलाशने का अजब ग़ज़ब संयोग

श्रीकांत वर्मा अपनी मगध सीरिज़ की कविताओं में लाख कहते रहे हों कि कोसल में विचारों की कमी है किंतु विचारवान कहे जाने वाले लोगों के पास लाभ के विचारों को प्राप...

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व्यक्ति मरता है, विचार नहीं

इतिहास साक्षी है कि प्रतिरोध की आवाज उठाने वाले, नई सोच और सिद्धांत प्रतिपादित करने वालों को तत्कालीन सत्ता या प्रभावशाली वर्ग अक्सर असहमति के कारण डराने-धमका...

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विनोद जी के कांधे पर दो दिवसीय साहित्य चौपाटी

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कौन सा रास्ता अपनायेंगे नक्सलवादी

भारत में नक्सलवाद आधी सदी से अधिक समय से आंतरिक सुरक्षा की सबसे बड़ी चुनौतियों में गिना जाता रहा है। आदिवासी असंतोष, गरीबी, शोषण और विकास से उपेक्षा के मुद्दो...

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सेल्फी का जुनून और मौत का सौदा

तकनीक और सोशल मीडिया ने हमारे जीवन को जितनी सुविधाएँ दी हैं, उतनी ही चुनौतियाँ भी दी हैं। इनमें सबसे खतरनाक है सेल्फी का जुनून। यह महज तस्वीर खींचने तक सीमित ...

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