नक्सलवाद के समाप्ति के बाद बस्तर में किस तरह का विकास होगा?

नक्सलवाद के समाप्ति के बाद बस्तर में किस तरह का विकास होगा?

-सुभाष मिश्रकेंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का तीन दिवसीय छत्तीसगढ़ दौरा एक सामान्य प्रशासनिक कार्यक्रम नहीं है। रायपुर के मेफेयर होटल में नक्सलवाद को लेकर हुई हा...

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सरकार की प्राथमिकता में बस्तर

सरकार की प्राथमिकता में बस्तर

-सुभाष मिश्रकेंद्र में भाजपा सरकार हो या छत्तीसगढ़ में, इन दिनों यदि किसी एक भू-भाग पर सबसे अधिक राजनीतिक, प्रशासनिक और सुरक्षा स्तर की गतिविधियाँ केंद्रित दि...

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टैरिफ घटा, तेवर नहीं: ट्रम्प की डील और भारत की दुविधा

सुभाष मिश्रभारत और अमेरिका के बीच जिस ट्रेड डील को लेकर लंबे समय से बातचीत च...

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खेल के मैदान में सत्ता की सियासत

खेल के मैदान में सत्ता की सियासत

-सुभाष मिश्रदरअसल, खेल को राजनीति से अलग रखने की बात जितनी बार दोहराई जाती है, उतनी ही बार वह झूठ साबित होती है। ओलंपिक से लेकर विश्व कप तक, हर बड़ा खेल आयोजन...

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यूजीसी के बहाने जातिगत विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने नियमों पर रोक लगाई

-सुभाष मिश्रयूजीसी के नए नियमों को लेकर देशभर में उठ रहा विवाद दरअसल किसी एक नीति या कैंपस व्यवस्था का सवाल नही...

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विमान हादसा, सत्ता का शून्य और महाराष्ट्र की राजनीति

-सुभाष मिश्रभारतीय राजनीति में कभी–कभी कोई एक घटना पूरे सत्ता-संतुलन को झकझोर देती है। यदि यह कल्पना भी की जाए ...

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संस्कृति बनाम मनोरंजन : सभ्यता का बौद्धिक संकट

-सुभाष मिश्रभारतीय संस्कृति सदियों से अपनी समृद्धता, गहनता और विविधता के कारण विश्वभर में प्रतिष्ठित रही है। यह...

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सत्ता मिशनरी बनाम नैतिक जिम्मेदारी: जब वर्दी ही शक का विषय बन जाए

-सुभाष मिश्रकर्नाटक के डीजीपी रामचंद्र राव का मामला जहाँ उन्हें महिलाओं को किस करने, ब्रेस्ट चूमने जैसे गंभीर आ...

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विवाह: संस्कार से ‘स्पेक्टेकल’ तक

-सुभाष मिश्रभारतीय समाज में विवाह परंपरागत रूप से संस्कार, मर्यादा और सामूहिक उत्तरदायित्व का प्रतीक रहा है। ले...

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खान-पान, आस्था और क़ानून के बीच संतुलन की ज़रूरत

खान-पान, आस्था और क़ानून के बीच संतुलन की ज़रूरत

हिंदुस्तानी समाज की सबसे बड़ी पहचान उसकी बहुलता रही है—भाषा, पहनावा, आस्था और खान-पान, सबमें विविधता। समुद्र किनारे बसे समाजों के लिए मछली जीवन का स्वाभाविक ह...

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