Editor-in-Chief सुभाष मिश्र की कलम से- शास्त्र की परंपरा, प्रवचन का उभार और राजनीति का प्रवेश

-सुभाष मिश्रभारतीय समाज की बुनियाद जिस बौद्धिक उदारता पर टिकी रही है, उसका सबसे जीवंत रूप शास्त्रार्थ की परंपरा...

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Editor-in-Chief सुभाष मिश्र की कलम से – सात फेरों की नहीं, अनुबंध की शादी

-सुभाष मिश्रविवाह भारतीय समाज में कभी केवल दो व्यक्तियों के बीच का निजी संबंध नहीं रहा। यह एक संस्कार था—जहां परिवार, समाज और धर्म साझी भूमिका निभाते थे। अग्न...

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अटल के आईने में आज की भाजपा, अटल से मोदी तक

सुभाष मिश्रभारतीय राजनीति में कुछ व्यक्तित्व ऐसे होते हैं, जो अपने समय से आग...

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वेतनमान की दुहाई, बाज़ार की बन आई

Demand for pay scale : बाज़ार की बन आई

‘हमको मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिनदिल को खुश रखने के लिए ग़ालिब खय़ाल अच्छा है।’यह पंक्ति ...

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Editor-in-Chief सुभाष मिश्र की कलम से – बैटल ऑफ़ बंगाल: सच के इर्द-गिर्द रची जा रही राजनीति

-सुभाष मिश्रकबीर ने चेताया था-मैं कहता अखंड देखी, तू कहता कागज़़ की लेखी।सच कहूँ तो मरन दावे, झूठे जग बौराना।आज ...

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एप्स्टीन फाइल्स से टेलीग्राम चैनलों तक प्लेजर, सत्ता और निजता का टूटता घेरा

-सुभाष मिश्रअमेरिका में एप्स्टीन फाइल्स को सार्वजनिक किए जाने का फैसला केवल एक कानूनी घटना नहीं है, यह उस दुनिय...

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‘होमबाउंड’ के बहाने भारतीय सिनेमा की पड़ताल

-सुभाष मिश्रभारतीय सिनेमा आज दुनिया का सबसे बड़ा सिनेमा उद्योग है। संख्या के लिहाज़ से हम हॉलीवुड से कहीं आगे ह...

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सरकारें तीन, साल दो: मोदी की गारंटी और भाजपा शासित राज्यों का द्विवार्षिक मूल्यांकन

-सुभाष मिश्रदिसंबर 2023 में मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में भाजपा ने सत्ता में वापसी या नए सिरे से प्रवे...

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Editor-in-Chief सुभाष मिश्र की कलम से- बंगाल की जमीन फिर तप रही है — आस्था, राजनीति और ध्रुवीकरण की बढ़ती आँच

-सुभाष मिश्रपश्चिम बंगाल अगले वर्ष विधानसभा चुनाव की ओर बढ़ रहा है और इसी के साथ राज्य की राजनीतिक धरती एक बार ...

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वंदे मातरम के 150 वर्ष और राजनीतिक तापमान

Editor-in-Chief सुभाष मिश्र की कलम से –वंदे मातरम के 150 वर्ष और राजनीतिक तापमान

-सुभाष मिश्रजब राष्ट्रीय गीत बहस का केंद्र बन जाए, तो समझना चाहिए कि राजनीति इतिहास से भी लुभावनी कथा गढ़ लेती है। लोकसभा में ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूरे हो...

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