Editor-in-Chief सुभाष मिश्र की कलम से- बंगाल की जमीन फिर तप रही है — आस्था, राजनीति और ध्रुवीकरण की बढ़ती आँच

-सुभाष मिश्रपश्चिम बंगाल अगले वर्ष विधानसभा चुनाव की ओर बढ़ रहा है और इसी के साथ राज्य की राजनीतिक धरती एक बार ...

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वंदे मातरम के 150 वर्ष और राजनीतिक तापमान

Editor-in-Chief सुभाष मिश्र की कलम से –वंदे मातरम के 150 वर्ष और राजनीतिक तापमान

-सुभाष मिश्रजब राष्ट्रीय गीत बहस का केंद्र बन जाए, तो समझना चाहिए कि राजनीति इतिहास से भी लुभावनी कथा गढ़ लेती है। लोकसभा में ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूरे हो...

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Editor-in-Chief सुभाष मिश्र की कलम से – हड़ताल, हवाई सेवाएं और निजीकरण की दिशा

-सुभाष मिश्रइंडिगो के कर्मचारियों की हालिया हड़ताल ने देश को एक ऐसे सच के सामने लाकर खड़ा किया है जिसे हम वर्षो...

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Editor-in-Chief सुभाष मिश्र की कलम से – रायपुर का स्टेडियम, उम्मीदों का मंच या अव्यवस्थाओं का दूसरा नाम?

-सुभाष मिश्रभारत में अगर किसी चीज़ को 'धर्म के बाद सबसे बड़ा धर्मÓ कहा जाए तो वह क्रिकेट है। क्रिकेट मैदान सिर्...

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Editor-in-Chief सुभाष मिश्र की कलम से – पुतिन की भारत यात्रा के मायने

-सुभाष मिश्रपूरी दुनिया आज एक-दूसरे से सघन रूप से जुड़ी हुई है। व्यापार हो या युद्ध, महामारी हो या वैश्विक मंदी...

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Editor-in-Chief सुभाष मिश्र की कलम से- AI: अपमान का नया औज़ार

-सुभाष मिश्रएआई यानी आर्टिफि़शियल इंटेलिजेंस आज मानव क्षमता का विस्तारशील इंजन है—विश्लेषण, भाषा, शोध, सुरक्षा,...

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अस्वस्थता के कारण विनोद कुमार शुक्ल एम्स में भर्ती

रायपुर। एक लंबे समय से स्वास्थ्य में समुचित सुधार नहीं होने के फलस्वरूप विनोद कुमार शुक्ल कल शाम को रायपुर स्थित एम्स में भर्ती किए गए हैं।

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करीब छह हज़ार यहूदी भारत छोड़ेंगे

-डॉ. सुधीर सक्सेनानई दिल्ली। सदियों पहले भारत आ बसे यहूदियों की संख्या इजराइल के निर्माण के बाद दहाई-दर-दहाई कम से कमतर होती गयी है। इस श्रृंखला की ताज़ा कड़ी...

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Editor-in-Chief सुभाष मिश्र की कलम से- रायपुर साहित्य महोत्सव गंभीर विमर्श का मंच बने

-सुभाष मिश्रसाहित्य किसी मंच की सजावट नहीं, समाज की अंत:शक्ति का उद्गम है। वही वह बीज है जिससे मनुष्य अपने भीतर न्याय, करुणा, असहमति और उम्मीद का अंकुर उगाता ...

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शीतकालीन सियासत का असली सवाल

शीतकालीन सियासत का असली सवाल

शीतकालीन सत्र की शुरुआत संसद के गलियारों में नहीं, बल्कि संसद के बाहर दिये गए तीखे बयानों से हुई। भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के आत्मविश्वास और विपक्ष...

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