04
Aug
सामाजिक ढांचे के वर्गीकरण और मानव संघर्ष को दर्शाती गांव गली में
रायपुर। हिंदी साहित्य के महान लेखक मुंशी प्रेमचंद, जिनकी रचनाओं में पूरा हिंदुस्तान दिखाई देता है यहाँ का सामाजिक ढांचा और उसकी विभिन्न परिस्तिथियां भारतीय सम...
03
Aug
सत्ता की अंधी दौड़: प्रभावशाली व्यक्तियों द्वारा यौन अपराध और समाज की जिम्मेदारी
कर्नाटक के पूर्व सांसद प्रज्वल रेवन्ना को बलात्कार के एक मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। यह फैसला बेंगलुरु की विशेष अदालत ने दिया, जहां रेवन्ना पर...
28
Jul
Editor-in-Chief सुभाष मिश्र की कलम से-अंधविश्वास की बलि चढ़ती मासूमियत
-सुभाष मिश्रभारत एक ऐसा देश है जहां प्रगति और पतन एक साथ सांस लेते हैं। एक ओर हम चंद्रमा और मंगल पर पहुंच रहे ह...
28
Jul
Editor-in-Chief सुभाष मिश्र की कलम से – पानी में डूबता, पानी को तरसता देश
-सुभाष मिश्रभारत, जहां नदियां जीवन की धारा मानी जाती हैं, आज एक विरोधाभासी जल संकट से गुजर रहा है। एक ओर करोड़ो...
27
Jul
Editor-in-Chief सुभाष मिश्र की कलम से – भारत में अश्लीलता का बढ़ता बाजार
-सुभाष मिश्रअश्लीलता के पक्षधर एक तर्क दिया करते हैं कि जहां बहुत वर्जनाएं होती हैं, सेक्स को लेकर परहेज पाला ज...
26
Jul
Editor-in-Chief सुभाष मिश्र की कलम से – बिना रीढ़ का सरकारी तंत्र
-सुभाष मिश्रजब सरकारी तंत्र कहा जाता है तो इसका आशय उस पूरी सरकारी व्यवस्था से है जो शासन...
25
Jul
Editor-in-Chief सुभाष मिश्र की कलम से – एक देश, एक शिक्षाप्रणाली: समता की दिशा या नियंत्रण का प्रयास?
-सुभाष मिश्रआधुनिक सामाजिक व्यवस्था में ही नहीं, प्राचीन समय में भी शिक्षा समाज में बदलाव का माध्यम रही है। मूल...