छत्तीसगढ़ में बढ़ती हिंसा और नशाखोरी: युवाओं का बिगड़ता मनोविज्ञान और समाज की जिम्मेदारी

धमतरी में हाल ही में हुई तीन युवकों की हत्या ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है। यह सिर्फ एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि समाज में पनप रही नशाखोरी, बढ़ती हिंसक प्रवृ...

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तिरंगा रैली: राष्ट्रभक्ति का उत्सव या राजनीतिक एजेंडा?

स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर इस साल भी 'हर घर तिरंगा अभियान और तिरंगा रैलियों का आयोजन पूरे देश में जोर-शोर से हो रहा है। 1 से 15 अगस्त 2025 तक चलने वाला यह अभि...

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धर्मांतरण की आड़ में हिंसा: छत्तीसगढ़ की सामाजिक सद्भावना पर खतरा

छत्तीसगढ़, जो अपनी आदिवासी संस्कृति और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए जाना जाता है, इन दिनों धार्मिक असहिष्णुता और हिंसा की घटनाओं से दागदार हो रहा है। हाल ही में क...

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वोट चोरी को लेकर विपक्ष का प्रदर्शन

वोट चोरी को लेकर विपक्ष का प्रदर्शन

समूचा विपक्ष चुनाव आयोग की भूमिका विशेष गहन पुनरीक्षण( एसआईआर) और वोट चोरी के मुद्दे को लेकर चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाते हुए दिल्ली की सडक़ों पर प्रदर्श...

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देशभक्ति की कसौटी या जिम्मेदारी की याद?

Editor-in-Chief सुभाष मिश्र की कलम से – देशभक्ति की कसौटी या जिम्मेदारी की याद?

-सुभाष मिश्रसुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी सीधे तौर पर राहुल गांधी की देशभक्ति पर सवाल नहीं उठाती, बल्कि एक विपक्षी नेता के रूप में उनकी जिम्मेदारी पर जोर देती ह...

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प्रभावशाली व्यक्तियों द्वारा यौन अपराध और समाज की जिम्मेदारी

सत्ता की अंधी दौड़: प्रभावशाली व्यक्तियों द्वारा यौन अपराध और समाज की जिम्मेदारी

कर्नाटक के पूर्व सांसद प्रज्वल रेवन्ना को बलात्कार के एक मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। यह फैसला बेंगलुरु की विशेष अदालत ने दिया, जहां रेवन्ना पर...

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अंधविश्वास की बलि चढ़ती मासूमियत

Editor-in-Chief सुभाष मिश्र की कलम से-अंधविश्वास की बलि चढ़ती मासूमियत

-सुभाष मिश्रभारत एक ऐसा देश है जहां प्रगति और पतन एक साथ सांस लेते हैं। एक ओर हम चंद्रमा और मंगल पर पहुंच रहे ह...

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Editor-in-Chief सुभाष मिश्र की कलम से - पानी में डूबता, पानी को तरसता देश

Editor-in-Chief सुभाष मिश्र की कलम से – पानी में डूबता, पानी को तरसता देश

-सुभाष मिश्रभारत, जहां नदियां जीवन की धारा मानी जाती हैं, आज एक विरोधाभासी जल संकट से गुजर रहा है। एक ओर करोड़ो...

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Editor-in-Chief सुभाष मिश्र की कलम से - भारत में अश्लीलता का बढ़ता बाजार

Editor-in-Chief सुभाष मिश्र की कलम से – भारत में अश्लीलता का बढ़ता बाजार

-सुभाष मिश्रअश्लीलता के पक्षधर एक तर्क दिया करते हैं कि जहां बहुत वर्जनाएं होती हैं, सेक्स को लेकर परहेज पाला ज...

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Editor-in-Chief सुभाष मिश्र की कलम से - बिना रीढ़ का सरकारी तंत्र

Editor-in-Chief सुभाष मिश्र की कलम से – बिना रीढ़ का सरकारी तंत्र

-सुभाष मिश्रजब सरकारी तंत्र कहा जाता है तो इसका आशय उस पूरी सरकारी व्यवस्था से है जो शासन...

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