हंसा कर ले किलोल, जाने कभेरे मर जाने

दिनेश चौधरीथियेटर करने वाले लोग थोड़े जुनूनी किस्म के होते हैं, पर अरुण पाण्डेय कुछ ज्यादा ही थे। इसे साधने के फेर में खुद को निचोड़ डाला। सिर्फ नाटक ही करना ...

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किस्साएं बड़के दा, रंगसंगीत और बतकही के ज़रिए अलबेले अरूण पांडे की बात

विवेचना रंगमंडल जबलपुर के ज़रिए अपनी लंबी और यादगार रंगयात्रा तय करके एक बड़ी रंगबिरादरी खड़े करने वाले अरूण पांडेय के रंगकर्म, संबंधों और नाटक के प्रति उनके ...

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11 साल के बच्चे ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी: CM श्री स्कूलों की प्रवेश परीक्षा संविधान का उल्लंघन

दिल्ली। दिल्ली सरकार के अधीन आने वाले सीएम श्री स्कूलों की एडमिशन पॉलिसी को लेकर 11 वर्षीय जन्मे...

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भारत में 6जी संचार सेवाओं की शुरुआत

भारत की डिजिटल यात्रा बीते एक दशक में अद्भुुत रही है। 2016 में जब देश में 4 जी सेवाएं व्यापक रूप से आईं, तब इंटरनेट उपभोक्ताओं की संख्या लगभग 30 करोड़ थी। आज ...

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छत्तीसगढ़ में कृषि में नवीन तकनीकों का समावेश

छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा कहा जाता है क्योंकि यहां की 80 प्रतिशत से अधिक आबादी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कृषि पर निर्भर है और लगभग 70 प्रतिशत से अधिक क्ष...

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शर्म करो… क्यों एक लेखक के पीछे पड़े हो?

ध्रुव शुक्लहिन्दी के प्रतिष्ठित कवि-कथाकार श्री विनोद कुमार शुक्ल को उनके उपन्यास -----' ...

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नवरात्रि गरबा में चढ़ा हिंदू-मुस्लिम रंग

-सुभाष मिश्रनवरात्रि के आगमन पर गरबा की थापें फिर चौक-चौराहों में गूंजने लगती है। यह पर्व न केवल मां दुर्गा की ...

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पारदर्शिता लाने कॉपीराइट कानून में प्रावधान हो

विनोदकुमार शुक्ल को हिन्दयुग्म प्रकाशन द्वारा दी गयी 30 लाख रुपए की रॉयल्टी को लेकर सोशल मीडिया पर हुई बहस में लेखक-प्रकाशक संबंधों को लेकर गहराई से बात नहीं ...

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स्थापित लेखकों को नये प्रकाशकों की तलाश

सुभाष मिश्र

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हिन्दी के लेखकों को प्रकाशकों से हिसाब मांगना चाहिए

सुभाष मिश्र( विनोद कुमार शुक्ल और 30 लाख की रायल्टी प्रसंग)

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