कांग्रेसियों की बयान बाजी

कांग्रेसियों की बयान बाजी

-सुभाष मिश्रकांग्रेस नेताओं के बोल-बच्चन इन दिनों फिर सुर्खियों में हैं और ऐसा लगने लगा है कि देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी के भीतर बयान देने की एक समाना...

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चल ख़ुसरो घर आपने

ऑस्ट्रेलिया से सुभाष मिश्र

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कर्ज के सहारे चलती राज्य व्यवस्था : भविष्य के संकट

-सुभाष मिश्रभारतीय संघीय ढांचे में राज्यों की वित्तीय स्वायत्तता एक महत्वपूर्ण विशेषता मानी जाती है लेकिन आज यही स्वायत्तता एक ऐसे मोड़ पर खड़ी दिखाई दे रही ह...

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जिस साम्राज्य का सूर्य नहीं डूबता था, उपनिवेशों की छाया में एक यात्रा

आस्ट्रेलिया से सुभाष मिश्र

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बांग्लादेश की नई सरकार और भारत की उम्मीदें

-सुभाष मिश्र1947 में उपमहाद्वीप के विभाजन के साथ जब पाकिस्तान अस्तित्व में आया, तब शायद ही किसी ने सोचा होगा कि उसी पाकिस्तान के भीतर उपेक्षा, भाषाई अस्मिता औ...

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रेरा: खरीदारों की ढाल या बिल्डरों की यार?

-सुभाष मिश्ररियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही लाने के उद्देश्य से बना रियल एस्टेट (Regulation and ...

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खिलौनों के बाजार में वयस्कों की भीड़

आस्ट्रेलिया से सुभाष मिश्र

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ऑस्ट्रेलिया में दान और मदद संस्कृति

ऑस्ट्रेलिया से सुभाष मिश्रभारत जैसे समाज में दान केवल सामाजिक व्यवहार नहीं, बल्कि सांस्कृ...

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जेल: सुधार गृह या यातना गृह?

-सुभाष मिश्रछत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पुत्र चैतन्य बघेल ने जेल से बाहर आने के बाद जो आरोप लग...

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धान का कटोरा और खनिज की धरती, संतुलन ही सुशासन की असली कसौटी

-सुभाष मिश्रछत्तीसगढ़ की राजनीति में धान केवल एक फसल नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था, समाज और सत्ता तीनों का केंद्र है। यही कारण है कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की ...

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