दुनियाभर के कामकाजी लोगों और खासकर टेक इंडस्ट्री से जुड़े युवाओं के लिए एक बहुत ही जरूरी और आंखें खोलने वाली खबर सामने आई है। ग्लोबल सर्वे एजेंसी गैलप की एक ताजा स्टडी में दावा किया गया है कि जो लोग दफ्तर के रोजमर्रा के कामकाज में आधुनिक तकनीकी बदलावों को नहीं अपना रहे हैं, उनकी नौकरी जाने का खतरा बाकी साथियों के मुकाबले सीधे तीन गुना ज्यादा बढ़ गया है। आज के दौर में ऑफिस के काम को तेजी से निपटाने वाले आधुनिक सॉफ्टवेयर और डिजिटल टूल्स केवल काम आसान बनाने का जरिया नहीं रहे, बल्कि वे आपकी नौकरी बचाने का सबसे बड़ा सुरक्षा कवच बन चुके हैं।
छब्बीस हजार कर्मचारियों पर हुआ बड़ा सर्वे, सामने आए हैरान करने वाले आंकड़े
गैलप ने यह अनुमान अमेरिका के 23,000 से अधिक कामकाजी लोगों पर किए गए एक बड़े सर्वे के आधार पर लगाया है। इस सर्वे में वो 660 लोग भी शामिल थे, जिनकी हाल ही में नौकरी चली गई थी। इसके स्टेटेस्टिकल मॉडल यानी आंकड़ों के गणितीय विश्लेषण से यह बात निकलकर आई है कि जो कर्मचारी महीने में कम से कम एक बार या उससे अधिक नए डिजिटल और स्मार्ट टूल्स का इस्तेमाल करते हैं, उनकी छंटनी की संभावना सिर्फ 6 फीसदी पाई गई। इसके उलट, जो कर्मचारी इन आधुनिक तकनीकों से पूरी तरह दूरी बनाकर रखते हैं, उनकी नौकरी जाने का रिस्क सीधे 18 फीसदी तक पहुंच जाता है।
कंपनियों के भीतर बनी नई विभाजक रेखा, भर्ती और छंटनी के बदले नियम
यह स्टडी साफ तौर पर इशारा करती है कि नई तकनीक अब कंपनियों के भीतर एक ऐसी विभाजक रेखा (Fault Line) बन चुकी है, जो सीधे तौर पर लोगों के करियर को तय कर रही है। कंपनियां अब न केवल नए उम्मीदवारों को नौकरी पर रखते समय उनकी तकनीकी साक्षरता (Technical Literacy) चेक कर रही हैं, बल्कि मंदी या बजट में कटौती के वक्त यह भी देख रही हैं कि किस कर्मचारी को दफ्तर में रोकना है और किसे बाहर का रास्ता दिखाना है। जो कर्मचारी नई पीढ़ी के सॉफ्टवेयर चलाना जानते हैं, कंपनियां उन्हें अपनी संपत्ति मान रही हैं।
कंपनियों और कर्मचारियों की सोच में बड़ा अंतर, छिपी हुई वजह आई सामने
इस रिपोर्ट का सबसे दिलचस्प और हैरान करने वाला पहलू कंपनियों और कर्मचारियों के बीच का वैचारिक अंतर है। छंटनी का शिकार हुए केवल 1 फीसदी कर्मचारियों ने माना कि उनकी नौकरी जाने की वजह नई तकनीक है। अधिकांश लोगों ने इसके लिए कंपनियों के पुनर्गठन यानी रीस्ट्रक्चरिंग (Restructuring), कॉस्ट-कटिंग (लागत में कटौती) या खराब आर्थिक हालातों को ज़िम्मेदार ठहराया। इसके उलट, डेटा के मुताबिक पिछले कुछ समय में कंपनियों द्वारा की गई छंटनी की घोषणाओं में तकनीक का प्रभाव सबसे बड़ा कारण था, जो कुल फैसलों का लगभग 40 फीसदी था। गैलप के मुख्य वैज्ञानिक जिम हार्टर का कहना है कि कंपनियां छंटनी का फैसला लेते समय मन में जो बात रखती हैं, कर्मचारी उसे सीधे तौर पर देख नहीं पाते हैं।