अगर आप इस साल कॉलेज की पढ़ाई पूरी करके पास-आउट हो रहे हैं या नौकरी के बाजार में कदम रखने की तैयारी कर रहे हैं, तो यह खबर आपके पूरे भविष्य को तय करने वाली है। देश के आईटी सेक्टर की दिग्गज कंपनी कॉग्निजेंट और ग्लोबल एजुकेशनल फर्म पियर्सन ने अपनी एक ताजा संयुक्त रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट के आंकड़े भारतीय युवाओं और पारंपरिक रूप से पढ़ाई करा रहे कॉलेजों की आंखें खोलने के लिए काफी हैं। रिपोर्ट साफ कहती है कि भारत में एंट्री-लेवल यानी शुरुआती स्तर की नौकरियों के काम इतनी तेजी से नई तकनीकों और आधुनिक डिजिटल सिस्टम के पास जा रहे हैं, जिसकी रफ्तार दुनिया के बाकी विकसित देशों से भी कहीं ज्यादा है।
भारत में शुरुआती स्तर के सैंतीस फीसदी काम अब डिजिटल सिस्टम के हवाले
इस रिपोर्ट को तैयार करने के लिए अमेरिका, ब्रिटेन और भारत के करीब साढ़े सात सौ एचआर लीडर्स यानी कंपनियों में भर्ती करने वाले बड़े अधिकारियों से बात की गई है। इस सर्वे से जो मुख्य बातें सामने आई हैं, वे काफी चौंकाने वाली हैं। भारत में एंट्री लेवल के सैंतीस फीसदी काम अब आधुनिक डिजिटल सॉफ्टवेयर खुद कर रहे हैं, जबकि इसका वैश्विक औसत यानी दुनिया भर का आंकड़ा तैंतीस फीसदी है। वहीं अठारह फीसदी एचआर मैनेजर्स ने तो यहां तक माना है कि उनके संगठनों में नए आने वाले कर्मचारियों का आधा या उससे ज्यादा काम इन आधुनिक डिजिटल टूल्स के जरिए ही संभाला जा रहा है। हालांकि, अस्सी फीसदी कंपनियों का मानना है कि इससे उनके कर्मचारी अब घिसे-पिटे रूटीन कामों से मुक्त होकर ज्यादा जरूरी कामों पर ध्यान दे पा रहे हैं।
अगले पांच साल में बदल जाएगी नए कर्मचारियों की भूमिका, नॉन-टेक फील्ड में भी बदलाव
यदि आपको लगता है कि नया तकनीकी बदलाव सिर्फ कंप्यूटर इंजीनियर्स या केवल तकनीकी नौकरियों को प्रभावित कर रहा है, तो आप पूरी तरह गलत हैं। कंपनियों के एचआर हेड अब बिल्कुल अलग तरह का टैलेंट ढूंढ रहे हैं। अब छियानबे फीसदी एचआर लीडर्स का मानना है कि अगले पांच सालों में एंट्री-लेवल रोल पूरी तरह बदल जाएंगे। नए कर्मचारियों को खुद काम करना नहीं होगा, बल्कि उन्हें आधुनिक डिजिटल सिस्टम के काम की निगरानी करनी होगी और मशीनों के फैसलों की जांच करके अपनी इंसानी समझ लगानी होगी। यही नहीं, अट्ठानबे फीसदी विशेषज्ञों का मानना है कि मार्केटिंग, सेल्स, लीगल और ऑपरेशन्स जैसे गैर-तकनीकी क्षेत्रों में भी नई तकनीकों की बुनियादी साक्षरता (Technical Literacy) अनिवार्य हो चुकी है।
हाइपर-स्पेशलाइज्ड डिग्री के मुकाबले बहुमुखी प्रतिभा और लिबरल आर्ट्स की मांग बढ़ी
इस बदलते दौर में अब कंपनियां किसी एक विषय की बहुत गहरी डिग्री के बजाय बहुमुखी प्रतिभा यानी इंटरडिसिप्लिनरी बैकग्राउंड (Interdisciplinary Background) वाले युवाओं को ज्यादा पसंद कर रही हैं। सत्तानबे फीसदी नियोक्ताओं का कहना है कि आज के दौर में कठिन समस्याओं को सुलझाना (Problem Solving Skills), दूसरों के साथ तालमेल बिठाना और इंसानी फैसला लेने की क्षमता जैसी सॉफ्ट स्किल्स किसी भी भारी-भरकम कोडिंग डिग्री से ज्यादा कीमती हो चुकी हैं। यही वजह है कि सरसठ फीसदी एचआर प्रोफेशनल्स अब लिबरल आर्ट्स और ह्यूमेनिटीज (मानविकी) की पढ़ाई करने वाले युवाओं को पहले से कहीं ज्यादा तवज्जो दे रहे हैं, ताकि वे बदलती परिस्थितियों के साथ खुद को आसानी से ढाल सकें।