नई दिल्ली। आधार कार्ड की भांति पैन कार्ड भी वर्तमान समय में एक अनिवार्य दस्तावेज बन चुका है। बैंकिंग सेवाओं, केवाईसी अपडेट करने और आयकर रिटर्न दाखिल करने जैसे महत्वपूर्ण वित्तीय कार्यों में इसकी भूमिका अपरिहार्य है। 1 अप्रैल से शुरू हो रहे नए वित्तीय वर्ष के साथ पैन कार्ड से जुड़े कई नियमों में बड़े बदलाव होने जा रहे हैं, जिनका सीधा असर आम नागरिक की वित्तीय गतिविधियों पर पड़ेगा।
पैन कार्ड बनवाने की प्रक्रिया में अब अधिक कड़ाई बरती जाएगी। नए नियमों के अनुसार, अब केवल आधार कार्ड के आधार पर पैन कार्ड जारी नहीं किया जाएगा। आवेदकों को आधार के साथ एक अन्य मूल दस्तावेज जैसे जन्म प्रमाण पत्र या ड्राइविंग लाइसेंस भी प्रस्तुत करना होगा। पते के प्रमाण के लिए भी अतिरिक्त दस्तावेज की आवश्यकता पड़ सकती है। यह नियम देश भर में प्रभावी होगा।
बैंकिंग लेनदेन की सीमाओं में भी व्यापक परिवर्तन किए गए हैं। अब तक बैंक में 50 हजार रुपये नकद जमा करने पर पैन कार्ड दिखाना अनिवार्य था, लेकिन अब इस व्यवस्था को वार्षिक आधार पर परिवर्तित कर दिया गया है। यदि कोई व्यक्ति एक वित्तीय वर्ष में अपने खाते में कुल 10 लाख रुपये या उससे अधिक जमा करता है, तो उसके लिए पैन कार्ड की जानकारी देना अनिवार्य होगा।
वाहन खरीदी और संपत्ति पंजीकरण के नियमों को भी संशोधित किया गया है। अब 5 लाख रुपये से अधिक मूल्य का वाहन (दोपहिया या चारपहिया) खरीदने पर ही पैन कार्ड देना अनिवार्य होगा। इसी प्रकार, संपत्ति के पंजीकरण के मामले में पैन कार्ड की अनिवार्यता की सीमा को 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 20 लाख रुपये कर दिया गया है।
होटल और रेस्टोरेंट के बिलों के नकद भुगतान पर पैन कार्ड देने की सीमा को 50 हजार रुपये से बढ़ाकर 1 लाख रुपये कर दिया गया है। बीमा प्रीमियम के भुगतान से जुड़े नियमों में भी इसी तरह के सुधार किए गए हैं। अन्य सामान्य लेनदेन के मामले में नियम यथावत हैं, लेकिन किसी भी प्रकार के 2 लाख रुपये से अधिक के वित्तीय लेनदेन पर पैन कार्ड दिखाना अनिवार्य रहेगा। ये सभी परिवर्तन 1 अप्रैल से प्रभावी रूप से लागू हो जाएंगे।