नई दिल्ली। हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व माना गया है, लेकिन अपरा एकादशी को सबसे फलदायी व्रतों में से एक बताया गया है। यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित होता है और मान्यता है कि श्रद्धा और नियमपूर्वक इसे करने से जीवन में सुख, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का आगमन होता है। साल 2026 में अपरा एकादशी 13 मई, बुधवार को मनाई जाएगी।
पंचांग के अनुसार, एकादशी तिथि की शुरुआत 12 मई को दोपहर 2 बजकर 52 मिनट से होगी। हालांकि हिंदू धर्म में उदया तिथि को मान्यता दी जाती है, इसलिए व्रत 13 मई को रखा जाएगा। वहीं व्रत का पारण 14 मई को किया जाएगा।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अपरा एकादशी व्रत करने से व्यक्ति को अपार पुण्य की प्राप्ति होती है। कहा जाता है कि यह व्रत जाने-अनजाने में हुए पापों से मुक्ति दिलाने वाला माना जाता है। साथ ही धन, यश और मानसिक शांति प्राप्त करने के लिए भी इसे बेहद शुभ माना गया है।
व्रत की तैयारी एक दिन पहले से शुरू करने की सलाह दी जाती है। 12 मई से ही सात्विक भोजन ग्रहण करना चाहिए और तामसिक चीजों से दूरी बनानी चाहिए। इस दौरान प्याज, लहसुन और चावल का सेवन नहीं किया जाता। कई लोग इस दिन रात्रि भोजन भी त्याग देते हैं।
13 मई की सुबह स्नान के बाद भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। पीले वस्त्र, धूप, दीप, फल, मिठाई और तुलसी दल अर्पित करना शुभ माना जाता है। एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते तोड़ना वर्जित होता है, इसलिए पूजा के लिए तुलसी दल पहले ही तोड़कर रख लेना चाहिए।
धार्मिक मान्यता है कि “ऊं नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करने और विष्णु कथा सुनने से व्रत का फल कई गुना बढ़ जाता है। इस दिन क्रोध, विवाद और नकारात्मक विचारों से दूर रहने की भी सलाह दी जाती है। अपरा एकादशी को भगवान विष्णु की कृपा पाने और जीवन में सुख-शांति बनाए रखने के लिए बेहद शुभ माना गया है।