विशेष गहन पुनरीक्षण यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन को लेकर पिछले दिनों चुनाव आयोग पर कई राजनीतिक सवाल उठे थे। मतदाताओं को वोटर लिस्ट से हटाने के आरोपों के बाद अब चुनाव आयोग अपनी छवि सुधारने के लिए पूरी तरह सक्रिय हो गया है। आयोग ने जनता का खोया हुआ भरोसा फिर से पाने के लिए एक राष्ट्रव्यापी अभियान की शुरुआत की है।
मीडिया और युवाओं पर विशेष फोकस
आयोग ने अपना पहला राष्ट्रव्यापी मीडिया सम्मेलन आयोजित किया, जिसमें देश भर के 350 से ज्यादा पत्रकारों ने हिस्सा लिया। इसका मुख्य उद्देश्य पारदर्शिता को बढ़ावा देना है। आयोग अब युवा मतदाताओं को जोड़ने के लिए शैक्षणिक संस्थानों में भी जागरूकता कार्यक्रम चलाएगा। अधिकारियों का कहना है कि तकनीक का इस्तेमाल करके चुनाव प्रक्रिया को और अधिक सरल, पारदर्शी और जवाबदेह बनाया जाएगा।

विवादों पर चुनाव आयोग का रुख
राजनीतिक दलों ने आयोग पर मनमाने ढंग से नाम काटने के गंभीर आरोप लगाए थे। इस पर आयोग के अधिकारियों ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि पूरी प्रक्रिया कानून के दायरे में रहकर की जा रही है। उन्होंने यह भी साफ किया कि यदि किसी मतदाता को अपने नाम को लेकर कोई आपत्ति है, तो उसके पास कानून के तहत अपनी बात रखने और उसे चुनौती देने के पूरे अवसर मौजूद हैं।
आयोग का यह नया अभियान यह दर्शाता है कि वे सिर्फ अपना बचाव करने के बजाय जनता के साथ सीधा संवाद करना चाहते हैं। चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने और लोगों को जागरूक करने के इन प्रयासों से उम्मीद है कि भविष्य में होने वाले चुनावों में जनता का विश्वास और अधिक मजबूत होगा। आयोग का जोर अब तकनीक के माध्यम से चुनावी कामकाज को ज्यादा सुलभ बनाने पर है।