कांकेर, 19 जुलाई : छत्तीसगढ़ सर्व पिछड़ा वर्ग समाज को 27 प्रतिशत आरक्षण देने और राष्ट्रीय जनगणना में पिछड़ा वर्ग के लिए अलग से कॉलम शामिल करने की मांग को लेकर समाज ने अपनी कमर कस ली है। इस सिलसिले में कांकेर के डडसेना कलार समाज भवन में समाज की एक महत्वपूर्ण जिला स्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में आगामी 19 जुलाई को होने वाले विशाल प्रदर्शन की तैयारियों और भावी रणनीतियों पर विस्तृत चर्चा की गई। इस बैठक में ओबीसी वर्ग के अंतर्गत आने वाले विभिन्न समाजों के प्रमुख और वरिष्ठ पदाधिकारी बड़ी संख्या में शामिल हुए।

बैठक को संबोधित करते हुए छत्तीसगढ़ सर्व पिछड़ा वर्ग समाज के संरक्षक हरेश चक्रधारी ने कहा कि समाज को एकजुट होना बेहद जरूरी है, क्योंकि हमारी एकजुटता देखकर ही सरकार हमारी मांगों को पूरा करेगी। उन्होंने रूपरेखा साझा करते हुए कहा कि संगठन को गांव स्तर से मजबूत बनाया जाएगा। चक्रधारी ने आंदोलन की रणनीति स्पष्ट करते हुए बताया कि प्रथम चरण में प्रदर्शन की शुरुआत कांकेर जिले से होगी, जिसके बाद बस्तर संभाग के सभी जिलों सहित मोहला-मानपुर और सिहावा-नगरी में जिला स्तरीय प्रदर्शन किए जाएंगे। द्वितीय चरण में यदि सरकार कदम नहीं उठाती है, तो संभाग स्तर पर आंदोलन को तेज किया जाएगा। अंतिम चरण में इन प्रयासों के बाद भी मांगें पूरी न होने की स्थिति में समाज द्वारा उग्र रुख अपनाते हुए विधानसभा का घेराव किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि समाज का मुख्य फोकस केवल 27% आरक्षण की मांग पर ही रहेगा।

चुनाव बहिष्कार की भी दी गई चेतावनी
बैठक में कलार समाज के संभागीय अध्यक्ष कमल किशोर ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि यदि हक की लड़ाई के लिए विरोध की आवश्यकता पड़ी तो समाज पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि जरूरत पड़ने पर समाज चुनाव तक का बहिष्कार करने से भी गुरेज नहीं करेगा। टीआर साहू ने कहा कि छत्तीसगढ़ में पिछड़ा वर्ग सबसे बड़ा समाज है। बस्तर से इस अधिकार की चिंगारी उठाई जा रही है, इसलिए हमें आपसी मतभेद भुलाकर संगठित होना होगा। नगर पालिका अध्यक्ष अरुण कौशिक ने पूर्व के आंदोलनों का जिक्र करते हुए कहा कि इससे पहले भी कई बार धरना-प्रदर्शन और पैदल यात्राएं की जा चुकी हैं, लेकिन मांगें अब तक अधूरी हैं। जब तक हम पूर्ण एकता का परिचय नहीं देंगे, तब तक सफलता मिलना मुश्किल है। लोकेश जैन ने कहा कि लोकतंत्र में बहुमत के आधार पर आरक्षण का लाभ मिलना चाहिए और समाज की यह मांग पूरी तरह से जायज है।
टिकेश्वरी सिन्हा ने संगठन की मजबूती के लिए हर समाज के प्रमुखों को मिलाकर एक विशेष समिति बनाने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि ओबीसी समाज केवल एक ‘वोट बैंक’ बनकर रह गया है। संगठन को मजबूत करने के लिए हमें गांव के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना होगा।
बैठक में ये रहे प्रमुख रूप से उपस्थित
इस जिला स्तरीय चिंतन-मनन बैठक में समाज के कई प्रबुद्ध जन और कार्यकर्ता उपस्थित रहे, जिनमें मुख्य रूप से अरविन्द जैन, मनीष योगी, हरेश चक्रधारी, जितेंद्र जायसवाल, रवि दुग्गा, बालकुवर प्रधान, राजेश साहू, मधेश्वर जैन, पुरुषोत्तम गजेंद्र, ओमप्रकाश, धन्नू राम साहू, अरुण कौशिक, अमृत लाल देवांगन, सरिता यादव, अमिता सोनी, विजय विश्कर्मा, प्रकाश निषाद, लोकनाथ राठौर और मनोज देवांगन सहित भारी संख्या में सामाजिक प्रतिनिधि शामिल थे।