नई दिल्ली। लियोनेल मेसी उस वक्त मैदान पर बिल्कुल अकेले बैठे थे। उनके चेहरे पर कोई शिकन नहीं थी, लेकिन वह अपने दिल का दर्द छुपाने की कोशिश कर रहे थे। उम्र के इस पड़ाव पर मेसी ने अर्जेंटीना के लिए शानदार खेल दिखाया, लेकिन फाइनल मुकाबले में टीम को जीत नहीं दिला सके। खिताबी मुकाबले में स्पेन ने अर्जेंटीना को एक गोल से हरा दिया। स्पेन की तरफ से यह निर्णायक गोल फेरन टोरेस ने किया।
मैदान पर स्पेन का दबदबा
रनर-अप मेडल लेते वक्त महान फुटबॉलर मेसी अपनी भावनाओं पर काबू नहीं रख पाए और उनकी आंखें नम हो गई। माना जा रहा है कि यह उनके करियर का आखिरी विश्व कप था। पूरे मैच के दौरान स्पेन की टीम का पलड़ा भारी रहा। उन्होंने मैदान पर लगभग पैंसठ प्रतिशत समय तक गेंद पर अपना नियंत्रण बनाए रखा। स्पेन के मजबूत डिफेंस के आगे मेसी कोई बड़ा कमाल नहीं दिखा पाए। उन्होंने पूरे मैच में केवल एक ही शॉट लिया।
शानदार सफर का अंत
इस टूर्नामेंट के दौरान मेसी का प्रदर्शन बेहद शानदार रहा। उन्होंने पूरे सफर में अपनी टीम के लिए कुल आठ गोल किए और चार गोल करने में मदद की। टीम के बाकी खिलाड़ियों का भी यही सपना था कि वे मेसी के लिए इस विश्व कप को जीतें। हालांकि आखिरी मुकाबले में किस्मत ने साथ नहीं दिया। अगले विश्व कप तक मेसी तैंतालीस वर्ष के हो जाएंगे, ऐसे में उनका आगे खेलना अब मुश्किल नजर आ रहा है।