बिलासपुर। हाईकोर्ट ने मानसिक रूप से दिव्यांग युवती के यौन शोषण के बाद गर्भवती होने के मामले में मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी की अनुमति दे दी है, कोर्ट ने मेडिकल रिपोर्ट और पूर्व कानूनी मिसालों के आधार पर माना कि अनचाही प्रेग्नेंसी को जारी रखना पीड़िता के लिए शारीरिक और मानसिक रूप से गंभीर नुकसानदायक होगा, विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम से कराई गई जांच रिपोर्ट में भी स्थिति स्पष्ट होने के बाद कोर्ट ने रिट पिटीशन मंजूर कर दी
मेडिकल निगरानी में होगा गर्भपात, डीएनए सैंपल सुरक्षित रखने का आदेश
कोर्ट ने निर्देश दिया कि पीड़िता अपने अभिभावक के साथ चीफ मेडिकल एंड हेल्थ ऑफिसर कांकेर के सामने पेश हो, जहां एक्ट 1971 के प्रावधानों के तहत गर्भपात कराया जाएगा, पूरी प्रक्रिया कम से कम दो विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में की जाएगी जिसमें एक गायनेकोलॉजिस्ट अनिवार्य होगा, सभी कानूनी औपचारिकताएं पूरी कर सुरक्षित मेडिकल सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी, साथ ही भ्रूण का डीएनए सैंपल लेकर उसे आपराधिक जांच के सबूत के तौर पर सुरक्षित रखने के निर्देश भी दिए गए हैं