रायपुर / चारामा
संघर्ष की तपिश जब मेहनत के सांचे में ढलती है, तो सफलता का सोना कुंदन बनकर चमकता है। छत्तीसगढ़ की माटी की बेटी और न्यू उड़ान जनसेवा फाउंडेशन की कोऑर्डिनेटर चंद्रकांति नागे ने इसे सच कर दिखाया है। हाल ही में रायपुर में आयोजित ‘आज की नारी: नारी शक्ति सम्मान’ समारोह में उन्हें उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए सम्मानित किया गया, जो उनके वर्षों के कठिन परिश्रम और अटूट संकल्प का परिणाम है।

संघर्ष से शिखर तक का सफर
चंद्रकांति का यह मुकाम रातों-रात नहीं मिला। इस मुकाम के पीछे छिपी है वह ‘संघर्ष की कहानी’, जहाँ संसाधनों की कमी तो थी, लेकिन सपनों की कोई सीमा नहीं थी। उन्होंने सिलाई, ब्यूटी (पार्लर) और अन्य व्यावसायिक हुनर को न केवल सीखा, बल्कि उसमें महारत हासिल की।
दिन-रात मेहनत , हजारों महिलाओं से संपर्क और कौशल विकास के प्रति उनकी लगन ने उन्हें एक अलग पहचान दिलाई। उन्होंने साबित किया कि अगर हुनर हाथों में हो और इरादों में मजबूती, तो कोई भी बाधा रास्ता नहीं रोक सकती।
रायपुर के एक गरिमामयी समारोह में रामायण फेम दीपिका चिखलिया और लोकप्रिय अभिनेत्री कांची सिंह ने चंद्रकांति नागे को सम्मानित किया। फाउंडेशन की निदेशक उषा शर्मा की उपस्थिति में मिला यह सम्मान केवल एक ट्रॉफी नहीं, बल्कि उन हजारों महिलाओं की उम्मीदों की जीत है, जिन्हें चंद्रकांति ने आगे बढ़ाया है।
हजारों हाथों को दिया हुनर, बनाया आत्मनिर्भर
चंद्रकांति नागे की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि उन्होंने अपनी सफलता को व्यक्तिगत नहीं रखा। उन्होंने
हजारों विद्यार्थियों को सिलाई और ब्यूटी जैसे कौशलों में प्रशिक्षित किया।
आज उनके सिखाए हुए कई प्रशिक्षु स्वयं के सेंटर और व्यवसाय चला रहे हैं।
उन्होंने समाज के उस वर्ग तक पहुँच बनाई जहाँ महिलाओं के लिए घर से निकलना भी चुनौती थी।
”एक महिला बढ़ती है, तो समाज बढ़ता है”
अपने प्रेरणादायी संदेश में चंद्रकांति कहती हैं, “आत्मनिर्भरता ही महिला की सबसे बड़ी शक्ति है। जब एक महिला अपने पैरों पर खड़ी होती है, तो वह केवल अपना घर नहीं, बल्कि पूरे समाज को विकास की दिशा में ले जाती है।”