MP News: कूनो नेशनल पार्क में ‘प्रोजेक्ट चीता’ का कमाल, 113 साल बाद दिखा दुर्लभ उल्लू, ‘स्याहगोश’ की भी हुई वापसी

श्योपुर/भोपाल: मध्य प्रदेश के श्योपुर में स्थित कूनो नेशनल पार्क (Kuno National Park) से वन्यजीव प्रेमियों के लिए एक बेहद अद्भुत और सुखद खबर सामने आई है। कूनो में चल रहे ‘प्रोजेक्ट चीता’ (Project Cheetah) का असर अब केवल चीतों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका जादू पूरे फॉरेस्ट एरिया और ईको-सिस्टम पर साफ दिखने लगा है।

हाल ही में हुए एक कैमरा ट्रैप सर्वे में कूनो के जंगलों से कुछ ऐसी तस्वीरें सामने आई हैं, जिसने देश भर के वन्यजीव विशेषज्ञों को चौंका दिया है। कूनो का पूरा सिस्टम अब इस कदर बहाल हो चुका है कि सालों पहले विलुप्त मान लिए गए बेहद दुर्लभ वन्यजीव यहाँ दोबारा लौट आए हैं।

113 साल बाद दिखा दुर्लभ जंगली उल्लू, ‘स्याहगोश’ भी कैमरे में कैद (Rare Wildlife Species in Kuno)

कैमरा ट्रैप सर्वे की रिपोर्ट के मुताबिक, कूनो के जंगलों में कई ऐसे जीवों की मौजूदगी दर्ज की गई है जो दशकों से लापता थे:

  • दुर्लभ जंगली उल्लू (Forest Owl): दुनिया से लगभग विलुप्त माने जा चुके इस वन उल्लू को कूनो के इतिहास में पूरे 113 साल बाद पहली बार देखा गया है। वन विभाग के अनुसार, दिसंबर 2025 से यह दुर्लभ उल्लू कूनो के जंगलों में नियमित रूप से देखा जा रहा है।
  • स्याहगोश या जंगली बिल्ली (Caracal): कूनो के जंगलों में बेहद दुर्लभ माने जाने वाले स्याहगोश (कैराकल) की तस्वीरें दशकों बाद पहली बार कैमरे में कैद हुई हैं, जो इसके दोबारा बसने का पुख्ता सबूत है।
  • जंगली कुत्ता (ढोल): कूनो के लिखित इतिहास में पहली बार जंगली कुत्तों (Dhole) की मौजूदगी पाई गई है। एक्सपर्ट्स इसे कूनो की बेहतर होती पारिस्थितिकी का सबसे बड़ा संकेत मान रहे हैं।
  • भारतीय भेड़िया (Indian Wolf): पहले गर्मियों का मौसम आते ही भेड़िए पानी और शिकार की कमी से कूनो छोड़कर भाग जाते थे, लेकिन अब सुधरे हालातों के कारण वे यहाँ के स्थायी निवासी (Permanent Residents) बन चुके हैं।

सोलर पंप और आधुनिक जल प्रबंधन ने बदली कूनो की किस्मत

कूनो के इस अभूतपूर्व कायाकल्प (Kuno Eco System Restoration) के पीछे वन विभाग की एक बेहतरीन और आधुनिक जल प्रबंधन नीति है। कूनो के जिन पथरीले और ऊंचे इलाकों में पानी की घोर किल्लत रहती थी, वहां अब कूनो नदी का पानी पहुंच रहा है।

इस पानी की सप्लाई को लगातार बनाए रखने के लिए वन विभाग ने Modern Technology यानी Solar Pumps का सहारा लिया है। इन सोलर पंपों की मदद से गर्मियों के इस कड़कते मौसम में भी कूनो के तालाब पानी से लबालब भरे हुए हैं, जिससे जानवरों को पलायन नहीं करना पड़ रहा है।

मवेशियों की घंटियों की जगह अब गूंज रहा है ‘जंगली सन्नाटा’

आज कूनो का नजारा पूरी तरह बदल चुका है। कभी यहाँ मवेशियों के गलों में बजने वाली घंटियों का शोर होता था, लेकिन अब उसकी जगह जंगली सन्नाटे, पक्षियों की मधुर चहचहाहट और वन्यजीवों की गूंजती पुकारों ने ले ली है।

शाम ढलते ही धूल भरे रास्तों से चीतलों की लंबी कतारें निकलती हैं और सांभर तालाबों के किनारे शांत खड़े दिखाई देते हैं। नीलगाय और तेंदुए अब पानी की तलाश में कहीं और भटकने के बजाय कूनो के इस ग्रीष्म जंगल को अपना स्थायी आशियाना मानकर यहाँ के तालाबों के आसपास घूमते नजर आते हैं।

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