नई दिल्ली। सरकारी तेल कंपनियों हिंदुस्तान पेट्रोलियम और भारत पेट्रोलियम को वित्त वर्ष 2026-27 की अप्रैल से जून वाली पहली तिमाही में बहुत बड़ा नुकसान उठाना पड़ा है। इसकी मुख्य वजह यह है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें काफी बढ़ गई थीं, लेकिन इसके बावजूद कंपनियों ने लंबे समय तक पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस के दाम नियंत्रित रखे और उन्हें लागत से कम कीमत पर बेचती रहीं। रिफाइनरी से कुछ फायदा जरूर हुआ, लेकिन ईंधन बेचने में हुए भारी नुकसान ने पूरे मुनाफे को खत्म कर दिया।
हिंदुस्तान पेट्रोलियम को इस तिमाही में 12265 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा हुआ है। पिछले साल इसी अवधि में कंपनी ने 4111 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया था। हालांकि कंपनी की कुल बिक्री और आय बढ़कर 1.45 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई, जो पिछले साल के मुकाबले करीब 21 प्रतिशत ज्यादा है, लेकिन लागत बढ़ने के कारण कंपनी फायदे में नहीं रह सकी।

इसी तरह भारत पेट्रोलियम को भी अप्रैल से जून तिमाही में 3962 करोड़ रुपये का घाटा झेलना पड़ा है। पिछले साल इसी तिमाही में इस कंपनी को 6124 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ था। हालांकि बीपीसीएल की कुल आय भी बढ़कर 1.59 लाख करोड़ रुपये हो गई, लेकिन ईंधन की कम कीमतों पर बिक्री जारी रहने के कारण उसे घाटा उठाना पड़ा। जानकारों के अनुसार वेस्ट एशिया के तनाव के कारण कच्चे तेल के दाम बहुत ज्यादा बढ़ गए थे, जिसका सीधा असर इन कंपनियों के वित्तीय परिणामों पर पड़ा है।