(मधुकर दुबे)
रायपुर। सत्ता की चकाचौंध में संगठन की बढ़ी दूरियों को खत्म करने की कवायद शुरू हो चुकी है। इसकी बड़ी वजह 2028 में होने वाला विधानसभा चुनाव है। जिसे देखते हुए शीर्ष नेतृत्व के निर्देश पर छत्तीसगढ़ भाजपा संगठन अभी से आगामी विधानसभा का रोडमैप तैयार करने में जुट गया है। फिलहाल अभी पहले चरण के रूप में अप्रत्यक्ष रूप से भाजपा ने काम करना शुरू कर दिया है। इसकी पहली सीढ़ी थी, ये पता करना क्या सरकार और भाजपा संगठन के बीच कैसा समन्वय है। इसके लिए पर्यवेक्षकों की ऐसी टीम जो संगठन के लिए गुप्त काम करने के साथ ही संगठन के शीर्ष नेतृत्व को आगाह करने का भी काम करती है।
सूत्रों के मुताबिक पार्टी के कैडर जन और संगठन के बीच कथाकथित सर्वे रिपोर्ट में बात सामने आई कि सरकार के बीच आपसी समन्वय की कमी है। इस तर्क की पुष्टि विपक्ष का यह आरोप, जिसमें कहा गया, भाजपा संगठन के लोग खुद को शासन-सत्ता से उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर सत्ताधारी पार्टी के ही जनप्रतिनिधि जनमुद्दों को लेकर शासन की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगाते नजर आ रहे हैं। इधर, बीच सुशासन तिहार में जनप्रतिनिधि और अधिकारी आमने-सामने आ रहे हैं। जिसे अब विपक्ष मुद्दा बनाकर भाजपा सरकार के खिलाफ सोशल मीडिया पर नैरेटिव खड़ी करती नजर आ रही है। जिसे भांपकर शीर्ष नेतृत्व ने इसे खत्म करने के साथ ही 2028 के विधानसभा चुनाव का रोडमैप तैयार करने में अभी से जुट गई। सूत्रों के मुताबिक शीर्ष नेतृत्व को सर्वे रिपोर्ट में यह पता चला कि जो दिग्गज नेता सत्ता सुख से दरकिनार हैं, उनमें अंदर ही अंदर असंतोष व्याप्त है। इसके कई कारण हो सकते हैं, चाहे शासन कार्यप्रणाली की हो, या उनके क्षेत्र की मांगों को दरकिनार करने की। इससे समय-समय सार्वजनिक मंचों से भी कई नेताओं के गुस्से जगजाहिर हो चुके हैं।
उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ भाजपा का पूरा जनाधार कई क्षत्रप नेताओं के जमीनी कार्यकर्ताओं के आधार पर जुड़ा है, ये दीगर है कि यहां मोदी मैजिक का बोलबाला है। ऐसे में अगर छोटे-बड़े दिग्गज क्षत्रप नेताओं को समय रहते नहीं संजोया गया तो विधानसभा चुनाव के परिणाम प्रभावित हो सकते हैं। इस व्यापक असंतोष को भांपते हुए शीर्ष नेतृत्व के निर्देश पर छत्तीसगढ़ भाजपा संगठन ने इस पर काम करना शुरू कर दिया है।
प्रथम चरण में पहले भाजपा के ऐसे क्षत्रप नेता जो विधायक या मंत्री तो नहीं है, लेकिन शासन के तमाम निगम-मंडल में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष हैं। पहले इनको साधने और उनकी नैतिक जिम्मेदारी का आभास करने के लिए कुशाभाऊ ठाकरे भाजपा कार्यालय में गुरुवार को आगामी कार्ययोजनाओं, शासकीय योजनाओं के क्रियान्वयन और संगठनात्मक समन्वय पर विस्तृत चर्चा की गई। बैठक को मुख्य रूप से भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरण देव, क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जम्वाल और प्रदेश संगठन महामंत्री पवन साय ने संबोधित किया और पदाधिकारियों को सेवाभाव के साथ काम करने का मंत्र दिया। इसके पीछे विपक्ष का तर्क है कि भाजपा अब संगठन और सत्ता की दूरी को कम करने में जुटी है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि संगठन के पदाधिकारी और कार्यकर्ताओं को एकजूट कर सरकार के बीच आपसी समन्वय बनाने की कवायद शुरू हो गई है। साथ ही केंद्र और राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को जनता के बीच पहुंचाने का लक्ष्य तय किया जा रहा है, इसकी समीक्षा भी संगठन करेगा।
-इस राजनीतिक कवायद के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि कार्यकर्ताओं को कैसे खुश किया जाए। कार्यकर्ता भी मेहनत का मेहनताना चाहते हैं। कुछ ही लोग मजे करें ओर बाकी लोग दरी उठाये-बिछाएं, अब ये नहीं होगा। सो अब सबके दिन फिरेंगे।
साय की छवि साफ सुथरी, पर ब्यूरोक्रेट्स से नाखुश
साय सरकार की छवि साफ-सुथरी है। प्रत्येक योजनाओं को जमीनी स्तर पर लागू कराने के लिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय व उपमुख्यमंत्री अरुण साव और विजय शर्मा प्रतिबद्ध हैं। वे बराबर अपने विभागीय ब्यूरोक्रेट्स को योजनाओं को मूर्तरूप देने के लिए दिशा-निर्देश देते हैं। लेकिन ब्यूरोक्रेट्स द्वारा कहीं न कहीं खामियां नजर आ ही जाती हैं। इसके मझले अधिकारियों का संवाद जनप्रतिनिधि और जनता के बीच ठीक नहीं है। इसमें सभी नहीं कुछ अधिकारी हैं, जो विसंगतियां पैदा कर रहे हैं। इस पर भी संगठन गंभीर है क्योंकि भाजपा सरकार के खिलाफ नैरेटिव फैलाने का यह हथियार बन सकता है।
इधर, ब्यूरोक्रेट्स आपसी गुटबाजी में लगे हैं, अब तक साफ संकेत नहीं है कि असली बॉस कौन है। पहले की सरकार में एक को साधे सब सधे था। इस सरकार में थोड़ा धुंधलका है। यही वजह है कि जिसको जहां मौका मिल खाते वो वहीं धुंआधार बैटिंग कर रहा है।