रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित सीजीपीएससी भर्ती घोटाले में बुधवार सुबह उस समय हलचल मच गई, जब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भिलाई और रायपुर में एक साथ बड़ी कार्रवाई शुरू की। सुबह करीब छह बजे चार सफेद इनोवा वाहनों में पहुंचे ईडी अधिकारियों ने पूर्व आईएएस अधिकारियों और भर्ती प्रक्रिया से जुड़े प्रमुख चेहरों के ठिकानों पर दबिश दी। कार्रवाई के दौरान सुरक्षा व्यवस्था इतनी कड़ी रही कि दोनों स्थानों पर सीआरपीएफ के हथियारबंद जवान तैनात किए गए।
भिलाई के सेक्टर-10 स्थित पूर्व आईएएस अधिकारी और छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (सीजीपीएससी) के तत्कालीन सचिव जीवन किशोर ध्रुव (जेके ध्रुव) के निवास पर ईडी की टीम घंटों तक दस्तावेजों की जांच करती रही। इसी तरह रायपुर में आयोग की पूर्व परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक के घर भी छापेमारी की गई। इसके अलावा राज्यपाल सचिवालय से जुड़े रहे पूर्व सचिव अमृत खलको के निवास पर भी अधिकारियों ने दस्तक दी। जांच एजेंसी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, बैंक खातों, संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों और वित्तीय लेन-देन के रिकॉर्ड खंगाल रही है।
ईडी की यह कार्रवाई इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि अब जांच केवल भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि उन आर्थिक लेन-देन और संभावित मनी लॉन्ड्रिंग के नेटवर्क तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है, जो इस पूरे घोटाले की जड़ माने जा रहे हैं। एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि कथित तौर पर प्रभाव और पैसे के दम पर की गई नियुक्तियों के पीछे वित्तीय लाभ का कोई संगठित तंत्र तो काम नहीं कर रहा था।
सीजीपीएससी भर्ती घोटाला वर्ष 2020 से 2022 के बीच आयोजित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़ा है। आरोप है कि चयन प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर हेराफेरी कर प्रभावशाली लोगों, अधिकारियों और नेताओं से जुड़े अभ्यर्थियों को लाभ पहुंचाया गया। इस मामले ने उस समय व्यापक राजनीतिक और सामाजिक विवाद का रूप ले लिया था, जब चयन सूची में शामिल कई नामों के संबंध प्रभावशाली परिवारों से होने की बात सामने आई थी।
जांच एजेंसियों के अनुसार तत्कालीन सचिव जेके ध्रुव पर अपने पद का दुरुपयोग कर अपने बेटे सुमित ध्रुव को लाभ पहुंचाने के आरोप भी लगे हैं। इससे पहले केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) भी उनके निवास पर छापेमारी कर महत्वपूर्ण दस्तावेज और साक्ष्य जुटा चुकी है। सीबीआई जांच के दौरान एक और चौंकाने वाला खुलासा सामने आया था। जांच में दावा किया गया कि महासमुंद जिले के बारनवापारा क्षेत्र स्थित एक रिसॉर्ट में परीक्षा से पहले कुछ चुनिंदा अभ्यर्थियों को प्रश्नपत्र या उससे संबंधित जानकारी उपलब्ध कराई गई थी। इस पूरे घटनाक्रम में एक कोचिंग संस्थान संचालक की भूमिका भी जांच के दायरे में आई थी। इन आरोपों ने भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे।
जांच में यह भी सामने आया कि मेरिट सूची के साथ कथित तौर पर इस तरह छेड़छाड़ की गई कि शीर्ष स्थानों पर आने वाले कई अभ्यर्थी प्रभावशाली परिवारों से जुड़े थे। इनमें आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी के रिश्तेदारों सहित कई रसूखदार लोगों के परिजन शामिल बताए गए, जिन्हें बाद में डिप्टी कलेक्टर, डीएसपी और अन्य महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्ति मिली।
इस मामले को लेकर युवाओं में भारी आक्रोश देखने को मिला था। लाखों प्रतियोगी परीक्षार्थियों ने चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाए थे। विपक्ष ने भी विधानसभा से लेकर सड़क तक इस मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाया, जिसके बाद राज्य सरकार ने मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी थी।
सीबीआई अब तक अदालत में सैकड़ों पन्नों की अंतिम और अनुपूरक चार्जशीट प्रस्तुत कर चुकी है। जांच के आधार पर आयोग के पूर्व अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी, पूर्व परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक समेत 12 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इनमें से कई आरोपी लंबे समय से जेल में बंद हैं और उनकी जमानत याचिकाएं भी अदालतों से खारिज हो चुकी हैं। अब ईडी की सक्रियता ने इस पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया है। माना जा रहा है कि एजेंसी भर्ती घोटाले से जुड़े कथित आर्थिक लाभ, संपत्तियों और धन के स्रोतों की गहराई से जांच कर रही है। यदि जांच में मनी लॉन्ड्रिंग के ठोस साक्ष्य सामने आते हैं तो आने वाले दिनों में कई और प्रभावशाली नाम जांच के घेरे में आ सकते हैं।
फिलहाल भिलाई और रायपुर में चल रही ईडी की कार्रवाई ने एक बार फिर सीजीपीएससी घोटाले की फाइलों को सुर्खियों में ला दिया है। प्रदेश के हजारों युवाओं की नजर अब इस बात पर टिकी है कि क्या जांच एजेंसियां भर्ती प्रक्रिया में हुए कथित भ्रष्टाचार और उससे जुड़ी आर्थिक परतों का पूरा सच सामने ला पाएंगी।