हिंदू धर्म में भगवान शिव की पूजा और जलाभिषेक का बहुत बड़ा महत्व बताया गया है. विशेष तौर पर सावन के पवित्र महीने में लोग शिवजी को प्रसन्न करने के लिए तमाम तरह की चीजें अर्पित करते हैं. ऐसे में अक्सर लोगों के मन में यह सवाल जरूर आता है कि क्या शिवलिंग पर सरसों का तेल चढ़ाना सही है या नहीं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसका जवाब बहुत महत्वपूर्ण है.
ज्योतिष शास्त्र के जानकारों का मानना है कि सरसों के तेल का इस्तेमाल मुख्य रूप से शनिदेव की पूजा में किया जाता है. अगर कोई भक्त पूरी श्रद्धा के साथ शिवलिंग पर सरसों का तेल अर्पित करता है, तो उसे शत्रु बाधाओं से मुक्ति मिल सकती है. ऐसा माना जाता है कि इससे जीवन में एक सुरक्षा कवच बनता है और नकारात्मक ऊर्जाएं दूर रहती हैं. हालांकि, सामान्य दिनों में शिवलिंग पर मुख्य रूप से जल, गंगाजल, कच्चा दूध और बेलपत्र चढ़ाने की ही परंपरा है.

विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि यदि कोई व्यक्ति किसी बुरे विचार या सिर्फ शत्रुओं को नुकसान पहुंचाने की मंशा से शिवलिंग पर तेल चढ़ाता है, तो उसका शुभ फल प्राप्त नहीं होता है. भगवान शिव की पूजा हमेशा साफ मन और सच्ची श्रद्धा के साथ की जानी चाहिए. किसी भी गलत भावना के साथ पूजा करने से बचना चाहिए, क्योंकि भोलेनाथ भाव के भूखे होते हैं और वे मन की पवित्रता देखते हैं.