25
Sep
शर्म करो… क्यों एक लेखक के पीछे पड़े हो?
ध्रुव शुक्लहिन्दी के प्रतिष्ठित कवि-कथाकार श्री विनोद कुमार शुक्ल को उनके उपन्यास -----' ...
25
Sep
नवरात्रि गरबा में चढ़ा हिंदू-मुस्लिम रंग
-सुभाष मिश्रनवरात्रि के आगमन पर गरबा की थापें फिर चौक-चौराहों में गूंजने लगती है। यह पर्व न केवल मां दुर्गा की ...
25
Sep
पारदर्शिता लाने कॉपीराइट कानून में प्रावधान हो
विनोदकुमार शुक्ल को हिन्दयुग्म प्रकाशन द्वारा दी गयी 30 लाख रुपए की रॉयल्टी को लेकर सोशल मीडिया पर हुई बहस में लेखक-प्रकाशक संबंधों को लेकर गहराई से बात नहीं ...
23
Sep
हिन्दी के लेखकों को प्रकाशकों से हिसाब मांगना चाहिए
सुभाष मिश्र( विनोद कुमार शुक्ल और 30 लाख की रायल्टी प्रसंग)
21
Sep
प्रकाशक शेर, लेखक शिकार
-सुभाष मिश्ररायपुर में आयोजित हिन्द युग्म उत्सव में प्रख्यात कवि-कथाकार विनोद कुमार शुक्ल को उनकी चार पुस्तकों की रॉयल्टी के रूप में तीस लाख की रकम का चेक भें...
21
Sep
साहित्य के ज़रिए राजनीतिक जमीन तलाशने का अजब ग़ज़ब संयोग
श्रीकांत वर्मा अपनी मगध सीरिज़ की कविताओं में लाख कहते रहे हों कि कोसल में विचारों की कमी है किंतु विचारवान कहे जाने वाले लोगों के पास लाभ के विचारों को प्राप...
20
Sep
व्यक्ति मरता है, विचार नहीं
इतिहास साक्षी है कि प्रतिरोध की आवाज उठाने वाले, नई सोच और सिद्धांत प्रतिपादित करने वालों को तत्कालीन सत्ता या प्रभावशाली वर्ग अक्सर असहमति के कारण डराने-धमका...
19
Sep
कौन सा रास्ता अपनायेंगे नक्सलवादी
भारत में नक्सलवाद आधी सदी से अधिक समय से आंतरिक सुरक्षा की सबसे बड़ी चुनौतियों में गिना जाता रहा है। आदिवासी असंतोष, गरीबी, शोषण और विकास से उपेक्षा के मुद्दो...