Editor-in-Chief सुभाष मिश्र की कलम से – छत्तीसगढ़ी: राजकीय भाषा का दर्जा, मगर ज़मीनी डगर कितनी लंबी?

-सुभाष मिश्रभाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, समाज की सामूहिक स्मृतियों और स्वाभिमान की वाहक भी होती है। छत्तीसगढ...

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Editor-in-Chief सुभाष मिश्र की कलम से – बेटी का दान या जाति का अपमान

-सुभाष मिश्रमध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में उठा हालिया विवाद, प्रशासनिक बयान की मर्यादा से कहीं आगे जाकर, समाज...

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Editor-in-Chief सुभाष मिश्र की कलम से – देश की कानून व्यवस्था और आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने की बड़ी कवायद

-सुभाष मिश्रप्रधानमंत्री के दौरे और देश के शीर्ष सुरक्षा-कमान के साए में होने वाला 60वां अखिल भारतीय डीजीपी-आईज...

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Editor-in-Chief सुभाष मिश्र की कलम से – ‘धर्म ध्वजा’ के बहाने: रामराज्य का विधान या नई राजनीतिक-धार्मिक संरचना?

सुभाष मिश्रअयोध्या में धर्म ध्वजा का फहराया जाना केवल एक धार्मिक अनुष्ठान भर नहीं है, यह उस यात्रा का अगला अध्य...

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छत्तीसगढ़ फिल्म एंड विजुअल आर्ट सोसाइटी ने दी ‘शोले’ के ‘वीरू’ को श्रद्धांजलि…

हिंदी सिनेमा के महानायक, ‘ही-मैन’ और ‘गरम धर्म’ के नाम से मशहूर अभिनेता धर्मेंद्र देओल का सोमवार...

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नई श्रम संहिता: श्रमिक संरक्षण और औद्योगिक लचीलापन के बीच उलझी बहस

-सुभाष मिश्रसरकार ने पांच साल पहले संसद से पारित चार नई श्रम संहिताओं—मजदूरी संहिता, औद्योगिक संबंध संहिता, साम...

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प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से- लाल किले के साये में विस्फोट, जब दिल्ली की सुरक्षा को चुनौती मिली

-सुभाष मिश्रदिल्ली को देश का दिल कहा जाता है और लाल किला उस दिल की धड़कन है। यह वह ऐतिहासिक प्रतीक, जहां से प्र...

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Editor-in-Chief सुभाष मिश्र की कलम से वंदे मातरम के जरिए राष्ट्रीय एकता और अखंडता की कोशिश

-सुभाष मिश्रदेश की स्वतंत्रता के आंदोलन में जब संघर्ष चरम पर था, तब जो स्वर सबसे बुलंद होकर उभरा था, वह था वंदे...

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Editor-in-Chief सुभाष मिश्र की कलम से- कर्मचारी की दिवाली, सरकार की गारंटी और जनता की अपेक्षा

-सुभाष मिश्रछत्तीसगढ़ में इस बार दीपावली सिर्फ रोशनी का पर्व नहीं, बल्कि कर्मचारियों की रणनीति तय करने का भी अव...

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