रायपुर साहित्य उत्सव-2026 – सत्ता और साहित्य के बीच संतुलन की तलाश

-सुभाष मिश्रछत्तीसगढ़ की पहचान केवल खनिज, वन, आदिवासी संस्कृति और नदियों तक सीमित नहीं रही है। यह वह भूमि है जह...

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सत्ता मिशनरी बनाम नैतिक जिम्मेदारी: जब वर्दी ही शक का विषय बन जाए

-सुभाष मिश्रकर्नाटक के डीजीपी रामचंद्र राव का मामला जहाँ उन्हें महिलाओं को किस करने, ब्रेस्ट चूमने जैसे गंभीर आ...

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विवाह: संस्कार से ‘स्पेक्टेकल’ तक

-सुभाष मिश्रभारतीय समाज में विवाह परंपरागत रूप से संस्कार, मर्यादा और सामूहिक उत्तरदायित्व का प्रतीक रहा है। ले...

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खान-पान, आस्था और क़ानून के बीच संतुलन की ज़रूरत

खान-पान, आस्था और क़ानून के बीच संतुलन की ज़रूरत

हिंदुस्तानी समाज की सबसे बड़ी पहचान उसकी बहुलता रही है—भाषा, पहनावा, आस्था और खान-पान, सबमें विविधता। समुद्र किनारे बसे समाजों के लिए मछली जीवन का स्वाभाविक ह...

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धर्मांतरण: आस्था, प्रलोभन या संगठित तंत्र?

-सुभाष मिश्रछत्तीसगढ़ में धर्मांतरण का प्रश्न कोई नया विषय नहीं है, लेकिन हाल के दिनों में सामने आए तथ्यों ने इ...

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महाराष्ट्र से बिहार तक : क्या बदलती भारतीय राजनीति का संकेत हैं ये चुनावी नतीजे

-सुभाष मिश्रमहाराष्ट्र के नगर निकाय चुनावों से लेकर बिहार विधानसभा चुनाव तक, एनडीए और भाजपा को मिली लगातार सफलत...

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