बस्तर का अगला अध्याय, बंदूक के बाद विकास की चुनौती

-सुभाष मिश्रबस्तर लंबे समय तक नक्सलवाद, हिंसा और सुरक्षा...

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अबूझमाड़ अब अबूझ नहीं रहा

-सुभाष मिश्रछत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल में स्थित अबूझमाड़ वर्षों तक देश के सबसे दुर्गम, रहस्यमय और प्रशासनिक पहुंच...

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अधिकारी और नेताओं के द्वंद में जनमुद्दे गुम

-सुभाष मिश्रलोकतांत्रिक व्यवस्था को सुचारू और सुगम तरीके से चलाने के लिए विभागीय अधिकारी और जनप्रतिनिधि एक सेतु...

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किताब समीक्षा- दो कतार पीछे: विडंबनाओं का घमासान

जयप्रकाश मानस का लघु कथाओं का संग्रह दो कतार पीछे हमारे समय की विडंबनाओं की ऐसी दास्तान है जो हमारे समय के सच का साक्षात्कार करती है। जयप्रकाश मानस मूलत: कवि ...

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स्याही से स्क्रीन तक की पत्रकारिता की यात्रा

-सुभाष मिश्रहिन्दी पत्रकारिता के दो सौ साल पूरे होने पर

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साहित्य, चिंतन और सृजन का संगम, 75वें वर्ष पर सम्मानित हुए बलराम जी

भारतीय ज्ञान परंपरा पर मंथन, साहित्यकारों की कृतियों का भव्य विमोचन

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मीडिया का वर्तमान परिदृश्य और चुनौतियां

-सुभाष मिश्रलोकतंत्र में स्वतंत्र पत्रकारिता को समाज की आँख, कान और चेतना मानता है। मीडिया की दुनिया में बीते क...

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बदलता बस्तर : भय से विश्वास और विकास तक

बदलता बस्तर : भय से विश्वास और विकास तक

सुभाष मिश्रकभी गोलियों की आवाज़, बारूदी सुरंगों और लाल आतंक से कांपने वाला बस्तर आज एक नए मोड़ पर खड़ा दिखाई देता है। जंगलों की खामोशी में अब विकास की हलचल सु...

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