-सुभाष मिश्र‘चोरी’ कभी अपराध मानी जाती थी, फिर वह आदत बनी, और अब ऐसा लगता है कि वह व्यवस्था का एक स्वीकृत व्यवहार बनती जा रही है। विडंबना यह है कि जिस दौर में...
-सुभाष मिश्रकभी भारतीय समाज में विवाह को केवल सामाजिक संस्था नहीं, बल्कि जीवन भर का साथ माना जाता था। पति या पत्नी के चले जाने के बाद शेष जीवन यादों के सहारे ...