नक्सलवाद की समाप्ति का दावा और सियासत की धार

नक्सलवाद की समाप्ति का दावा और सियासत की धार

-सुभाष मिश्रसंसद में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का हालिया बयान केवल एक सुरक्षा उपलब्धि का ब्योरा नहीं था, बल्कि उसमें सियासत की तीखी धार भी साफ दिखाई दी। उन्...

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महिलाएं वोट बैंक से आगे भी है

-सुभाष मिश्रअगले महीने होने जा रहे विधानसभा चुनावों ने एक बार फिर भारतीय राजनीति की उस सच्चाई को सामने ला दिया ...

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तेज उड़ान की ओर भारत: कनेक्टिविटी से बदलती अर्थव्यवस्था की दिशा

-सुभाष मिश्रभारत का नागरिक उड्डयन क्षेत्र अब केवल हवाई यात्रा की सुविधा भर नहीं रह गया है; यह देश की बदलती अर्थ...

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कॉल सेंटर की आड़ में साइबर ठगी: लोकल से ग्लोबल हुआ अपराध

-सुभाष मिश्ररायपुर में कॉल सेंटर की आड़ में चल रहे जिस अंतरराष्ट्रीय ठगी नेटवर्क का भंडाफोड़ हुआ है, वह कोई एक isolated घटना नहीं, बल्कि उस खतरनाक ट्रेंड का ह...

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नक्सलवाद पर आखिरी चोट, समर्पण का अवसर या समाप्ति का खतरा

-सुभाष मिश्रबस्तर के जंगलों में दशकों से गूंजती रही बंदूक की आवाज अब अपने अंतिम पड़ाव की ओर बढ़ती दिख रही है। क...

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कोविड जैसे लॉकडाउन के हालात तो नहीं..?

-सुभाष मिश्रपश्चिम एशिया में बढ़ते युद्ध जैसे हालातों ने एक बार फिर दुनिया को उस कड़वे सच के सामने ला खड़ा किया...

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क्या धर्म परिवर्तन को रोक पाएंगे न्यायालय और सरकार के फैसले

-सुभाष मिश्रधर्मांतरण, आरक्षण और आदिवासी समाज—इन तीनों के बीच खिंची महीन रेखा को हालिया न्यायिक और विधायी घटनाओ...

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युद्ध को लेकर भारत की सोच

-सुभाष मिश्रपश्चिम एशिया में उभरते युद्ध के हालातों के बीच आखिरकार भारत की आधिकारिक आवाज सामने आई है। प्रधानमंत...

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बदलते बस्तर में उमड़ता जनसैलाब : शांति, विकास और चुनौती का संगम

-सुभाष मिश्रबस्तर आज एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है, जहां अतीत की छाया और भविष्य की संभावनाएँ आमने-सामने दिखाई देती हैं। दशकों तक नक्सल हिंसा और भय के पर्याय रहे इस क...

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स्त्री के प्रति भारतीय समाज का दोहरा नजरिया

-सुभाष मिश्रभारतीय समाज को प्राय: आस्था और अध्यात्म का समाज कहा जाता है। यहाँ धर्म केवल व्यक्तिगत विश्वास का वि...

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