-सुभाष मिश्रदुनिया के किसी भी हिस्से में युद्ध केवल सीमाओं तक सीमित नहीं रहता। उसका असर बाजार, तेल, मुद्रा, रोजगार और आम आदमी की रसोई तक पहुंचता है। आज पश्चिम...
सुभाष मिश्रछत्तीसगढ़ के शिक्षा जगत में आज एक गंभीर और चिंताजनक प्रवृत्ति तेजी से उभर रही है शब्दों और ज्ञान से ज्यादा अब ‘कोर्स से बाहर की किताबों’ का खेल हाव...
-सुभाष मिश्रभारतीय परंपरा में वाणी को केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि चरित्र का दर्पण माना गया है। कबीर, रहीम, तुलसीदास और गुरु नानक जैसे संतों ने बार-ब...