जयप्रकाश मानस का लघु कथाओं का संग्रह दो कतार पीछे हमारे समय की विडंबनाओं की ऐसी दास्तान है जो हमारे समय के सच का साक्षात्कार करती है। जयप्रकाश मानस मूलत: कवि ...
सुभाष मिश्रकभी गोलियों की आवाज़, बारूदी सुरंगों और लाल आतंक से कांपने वाला बस्तर आज एक नए मोड़ पर खड़ा दिखाई देता है। जंगलों की खामोशी में अब विकास की हलचल सु...