आरोप, एजेंसियां और लोकतंत्र का नैरेटिव

-सुभाष मिश्रदिल्ली की शराब नीति से जुड़े मामलों में लंबी जांच, गिरफ्तारियां और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बाद जब अदालतें कई आरोपियों को राहत देती हैं या सबूत...

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यह जो पब्लिक है सब जानती है

-सुभाष मिश्रकक्षा आठ की सामाजिक विज्ञान की पुस्तक से न्यायपालिका में भ्रष्टाचार से जुड़े अध्याय को हटाने का निर...

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नाम बदलने और छोटे का चलन

-सुभाष मिश्रकेरल का नाम बदलकर केरलम हो गया। इलाहाबाद अब प्रयागराज है। बम्बई अब मुम्बई है। जेनजी के लिए रायपुर क...

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‘संकल्प’ या संदेह? छत्तीसगढ़ के बजट पर एक संतुलित पड़ताल

-सुभाष मिश्रवित्त वर्ष 2026-27 के लिए 1.72 लाख करोड़ का 'संकल्पÓ बजट विधानसभा में पेश होते ही छत्तीसगढ़ की राजन...

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विकसित छत्तीसगढ़ की दिशा: संकेत, संकल्प और बजट की कसौटी

विकसित छत्तीसगढ़ की दिशा: संकेत, संकल्प और बजट की कसौटी

सुभाष मिश्रछत्तीसगढ़ विधानसभा के अष्टम सत्र में राज्यपाल रमेन डेका के अभिभाषण, आर्थिक सर्वेक्षण और आगामी बजट की तैयारियों ने राज्य की विकास यात्रा की एक स्पष्...

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टैरिफ का ट्रंप कार्ड और वैश्विक अनिश्चितता

-सुभाष मिश्रअमेरिकी राजनीति में डोनाल्ड ट्रंप का सबसे प्रभावी हथियार यदि कोई रहा है तो वह टैरिफ नीति है एक ऐसा आर्थिक औजार जिसे उन्होंने कूटनीतिक दबाव, घरेलू ...

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संवेदनशील न्याय की जरूरत: यौन अपराधों पर न्यायपालिका की नई पहल

-सुभाष मिश्रयौन हिंसा और विशेषकर बच्चों व महिलाओं के खिलाफ अपराध आज केवल भारत की समस्या नहीं रह गए हैं, बल्कि य...

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मध्य प्रदेश सरकार का बजट: धर्म ध्वजा फहरानी साधु

-सुभाष मिश्रमध्यप्रदेश सरकार का 2026-27 का बजट सिर्फ आंकड़ों का दस्तावेज नहीं है, यह एक राजनीतिक संकेत भी है। वित्तमंत्री के बजट भाषण से लेकर योजनाओं के नाम त...

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कानून, अदालत और बदलता समाज

-सुभाष मिश्रन्यायालय जब निर्णय सुनाता है तो वह केवल किसी एक व्यक्ति के भाग्य का निर्धारण नहीं करता, बल्कि कानून...

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परीक्षा, हुनर और भविष्य- क्या बोर्ड एग्जाम है अंतिम सत्य है?

-सुभाष मिश्रफरवरी-मार्च का महीना आते ही देश का माहौल बदल जाता है। होली की आहट, मौसम का बदलाव और इसके साथ ही बोर...

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