Editor-in-Chief सुभाष मिश्र की कलम से – कहने को तो हैं दुनिया में सुखऩवर बहुत अच्छे

-सुभाष मिश्रमिर्जा असद-उल्लाह बेग ख़ाँ, जिन्हें दुनिया मिर्जा ग़ालिब के नाम से जानती है, को याद करना किसी एक शा...

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Editor-in-Chief सुभाष मिश्र की कलम से- शास्त्र की परंपरा, प्रवचन का उभार और राजनीति का प्रवेश

-सुभाष मिश्रभारतीय समाज की बुनियाद जिस बौद्धिक उदारता पर टिकी रही है, उसका सबसे जीवंत रूप शास्त्रार्थ की परंपरा...

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Editor-in-Chief सुभाष मिश्र की कलम से – सात फेरों की नहीं, अनुबंध की शादी

-सुभाष मिश्रविवाह भारतीय समाज में कभी केवल दो व्यक्तियों के बीच का निजी संबंध नहीं रहा। यह एक संस्कार था—जहां परिवार, समाज और धर्म साझी भूमिका निभाते थे। अग्न...

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