राशन दुकानों की जांच पर सियासी ग्रहण, सवालों के घेरे में

बिलासपुर। सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत राशन वितरण में कथित अनियमितताओं की जांच राजनीतिक दबाव के चलते धीमी पड़ती नजर आ रही है। अप्रैल माह में बिलासपुर शहर की 99 उचित मूल्य की दुकानों में 10 से 57 प्रतिशत तक राशन का वितरण बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण के बजाय ओटीपी के माध्यम से किए जाने का मामला सामने आया था। आरोप है कि इनमें कई दुकानें भाजपा और कांग्रेस के प्रभावशाली नेताओं तथा राशन विक्रेता संघ के पदाधिकारियों से जुड़ी होने के कारण जांच अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ पा रही है। खाद्य संचालनालय ने सभी 99 दुकानों की जांच कर 25 जून तक रिपोर्ट अनिवार्य रूप से प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे। हालांकि निर्धारित समयसीमा बीत जाने के बावजूद जांच पूरी नहीं हो सकी है। इसे लेकरप्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। चर्चा है कि राजनीतिक संरक्षण प्राप्त दुकानदारों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर अधिकारी सतर्क रुख अपनाए हुए हैं।


केंद्र सरकार की आपत्ति के बाद शुरू हुई जांच


जानकारी के अनुसार, अप्रैल में तीन माह का राशन एक साथ वितरित किए जाने के दौरान हुई अनियमितताओं पर केंद्र सरकार ने आपत्ति जताई थी। इसके बाद खाद्य संचालनालय की ओर से मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के निर्देश दिए गए। खाद्य संचालक फरिहा आलम सिद्दीकी ने इस मामले में ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाने और नियमों के उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई करने की चेतावनी दी थी।
निर्देशों में स्पष्ट किया गया था कि दिव्यांग और बुजुर्ग हितग्राहियों को छोड़कर अन्य सभी मामलों में ओटीपी के माध्यम से राशनसभी मामलों में ओट के माध्यम से राशन वितरण किया जाता है। इसके बावजूद, बिलासपुर शहर की 163 उचित मूल्य दुकानों में से 99 दुकानों पर नियमों के विपरीत ओट के जरिए राशन वितरण किए जाने की पुष्टि होने पर जांच शुरू की गई थी।


खाद्य नियंत्रणर बोले – जांच जारी है

खाद्य नियंत्रणर अमृत कुजूर ने बताया कि जांच प्रक्रिया अभी जारी है। उन्होंने कहा कि जिन दुकानदारों के खिलाफ अनियमितता पाए जाने के संकेत मिल रहे हैं, उन्हें भविष्य में नियमों का उल्लंघन नहीं करने की कड़ी चेतावनी दी जा रही है। हालांकि जांच पूरी होने और रिपोर्ट प्रस्तुत होने के बाद ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

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