नई दिल्ली। पिछले साल दिसंबर में मशहूर स्टार संजय खान की पत्नी जरीन खान का निधन हो गया था। उनके निधन के बाद परिवार को सोशल मीडिया पर काफी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था। अब मां के जाने के कई महीनों बाद उनकी बेटी और मशहूर डिजाइनर फराह खान अली ने उस विवाद पर चुप्पी तोड़ी है। उन्होंने बताया है कि आखिर परिवार ने जरीन खान का अंतिम संस्कार हिंदू रीति-रिवाजों से करने का फैसला क्यों लिया था।
क्लॉस्ट्रोफोबिया और आखिरी इच्छा
फराह ने एक बातचीत में बताया कि उनकी मां की यह साफ तौर पर आखिरी इच्छा थी। जरीन खान का जन्म एक पारसी परिवार में हुआ था और उन्होंने एक मुस्लिम से शादी की थी। इसके बावजूद उन्होंने अपने परिवार से कहा था कि उनका अंतिम संस्कार हिंदू परंपरा के अनुसार किया जाए। फराह ने इसका कारण बताते हुए कहा कि उनकी मां चाहती थीं कि उनकी अस्थियां कश्मीर की बहती नदी में विसर्जित की जाएं। इसके अलावा, उन्हें क्लॉस्ट्रोफोबिया था, जिसका मतलब है कि उन्हें बंद जगहों या कब्र में दफनाए जाने से बहुत डर लगता था। इसी डर के कारण उन्होंने अपना अंतिम संस्कार करने को कहा था।
हिंदू और मुस्लिम दोनों तरफ से हुई थी आलोचना
फराह खान अली ने बताया कि जब उनका निधन हुआ और परिवार ने उनकी इच्छा का सम्मान किया, तो उन्हें सोशल मीडिया पर कड़े विरोध का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि यह बहुत दुखद था। मुस्लिम समुदाय से लोग सवाल पूछ रहे थे कि वह मुस्लिम थीं तो अंतिम संस्कार क्यों किया गया। वहीं, हिंदू समुदाय के लोग भी अपनी तरफ से कठोर टिप्पणियां कर रहे थे। परिवार ने इन मुश्किल हालातों के बीच भी अपनी मां की आखिरी इच्छा को पूरा किया।
कौन थीं जरीन खान?
जरीन खान का निधन 7 नवंबर 2025 को कार्डियक अरेस्ट के कारण उनके मुंबई स्थित घर पर हुआ था। वह 1960 के दशक की मशहूर मॉडल और एक्ट्रेस थीं। इंटीरियर डिजाइनिंग की दुनिया में नाम कमाने से पहले उन्होंने तेरे घर के सामने और एक फूल दो माली जैसी फिल्मों में काम किया था। उनके अंतिम संस्कार की रस्में उनके बेटे जायद खान ने निभाई थीं। इस मौके पर उनकी बेटियां फराह, सुजैन, सिमोन के अलावा उनके पूर्व दामाद ऋतिक रोशन और फिल्म जगत की कई जानी-मानी हस्तियां मौजूद थीं।