चारामा। प्रदेश सरकार और प्रशासन के सुस्त रवैये के कारण चारामा विकास खंड के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों का भविष्य और जान दोनों दांव पर लगी हुई है। प्रशासनिक लापरवाही का आलम यह है कि क्षेत्र के कई स्कूली भवन पूरी तरह जर्जर हो चुके हैं, जहाँ बच्चे हर दिन जान हथेली पर रखकर बैठने को मजबूर हैं। सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच का यह फासला शासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
पुरी स्कूल का हाल बेहाल, मौत के साए में पढ़ाई
विकास खंड के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत पुरी का शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। विद्यालय का भवन अत्यंत जर्जर हो चुका है। छत से आए दिन प्लास्टर गिर रहा है और बारिश के दिनों में पानी टपकने के कारण स्थिति और भयानक हो जाती है। जर्जर छत के नीचे बैठते वक्त विद्यार्थियों और शिक्षकों के मन में हमेशा किसी बड़े हादसे का डर बना रहता है। नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत हो चुकी है, लेकिन सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने के बजाय बच्चों को उसी मौत के साए में पढ़ाई करने के लिए छोड़ दिया गया है।
आवेदनों पर साल भर बाद भी कोई सुनवाई नहीं: सरपंच
ग्राम पंचायत पुरी के सरपंच दीपक गावड़े ने प्रशासन और सरकार की घोर लापरवाही पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया है। उन्होंने बताया कि नए स्कूल भवन की मांग को लेकर पिछले दो वर्षों से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री से लेकर संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों और शिक्षा विभाग को कई बार लिखित आवेदन दिए जा चुके हैं।
सरपंच ने बताया कि पिछले साल आयोजित ‘सुशासन तिहार’ और ‘बस्तर मुन्ने’ जैसे बड़े कार्यक्रमों में भी नए भवन के लिए बकायदा आवेदन सौंपे गए थे, और इस साल भी आवेदन दिए गए हैं। लेकिन विडंबना देखिए कि साल भर से ज्यादा का समय बीत जाने के बाद भी उन आवेदनों पर आज तक कोई सुनवाई नहीं हुई। सरपंच और ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही नए विद्यालय भवन की स्वीकृति नहीं दी गई, तो वे उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
पूरे विकास खंड की यही कहानी, बीईओ का बयान
यह समस्या सिर्फ किसी एक स्कूल की नहीं है, बल्कि पूरे चारामा विकास खंड में शिक्षा व्यवस्था का बुनियादी ढांचा चरमरा गया है। क्षेत्र के कई सरकारी स्कूलों के भवन मरम्मत के अभाव में खंडहर में तब्दील हो रहे हैं। इस संबंध में जब खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) से बात की गई, तो उन्होंने भी स्वीकार किया कि विकास खंड के कई स्कूलों की हालत चिंताजनक है। खंड शिक्षा अधिकारी ने कहा:
“जर्जर स्कूलों की सूची और नए भवनों के प्रस्ताव उच्च अधिकारियों व शासन को भेजे जा चुके हैं। जैसे ही वहां से बजट और स्वीकृति प्राप्त होगी, निर्माण कार्य शुरू कराया जाएगा।”
फाइलों के चक्कर में कब तक फंसा रहेगा भविष्य?
खंड शिक्षा अधिकारी के इस बयान और प्रशासन के सुस्त रवैये से यह साफ है कि फाइलों के चक्कर में बच्चों का भविष्य और सुरक्षा दोनों को दांव पर लगा दिया गया है। जब जनता अपनी समस्याओं को लेकर सरकार के बड़े आयोजनों में आवेदन देती है और साल भर बाद भी उन पर कोई कार्रवाई नहीं होती, तो ऐसे सिस्टम पर सवाल उठना लाजिमी है। ग्रामीणों और पालकों ने मांग की है कि सरकार और संबंधित अधिकारी कागजी खानापूर्ति से बाहर निकलकर जमीनी हकीकत देखें और चारामा विकास खंड के सभी जर्जर स्कूलों के लिए तत्काल नया भवन स्वीकृत करें।