विकसित छत्तीसगढ़ के सपनों के बीच जर्जर छात्रावास में कैद भविष्य, मौत के साए में पढ़ाई को मजबूर छात्र

रायपुर। एक तरफ सरकार विकसित छत्तीसगढ़ और बेहतर शिक्षा सुविधाओं के दावे कर रही है, वहीं दूसरी तरफ राजधानी रायपुर के डीडीयू नगर स्थित शासकीय स्नातकोत्तर अनुसूचित जाति बालक छात्रावास की बदहाल तस्वीर इन दावों की हकीकत बयां कर रही है। यहां रहने वाले छात्र शिक्षा ग्रहण करने नहीं, बल्कि हर दिन अपनी जान जोखिम में डालकर जीवन गुजारने को मजबूर हैं।

प्रदेश के दूरस्थ अंचलों से उच्च शिक्षा और मास्टर डिग्री की पढ़ाई करने रायपुर पहुंचे अनुसूचित जाति वर्ग के छात्र जिस छात्रावास में रह रहे हैं, उसकी इमारत अब खंडहर में तब्दील होती जा रही है। भवन की दीवारें और छज्जे जगह-जगह से टूट चुके हैं, सीमेंट उखड़कर लोहे की सरिए बाहर झांक रही हैं। कमरों की छतों से पानी रिस रहा है और मानसून की दस्तक के साथ हालात और भयावह होने की आशंका बढ़ गई है।

छात्रों का कहना है कि छात्रावास परिसर में अक्सर सांप और बिच्छू जैसे जहरीले जीव निकल आते हैं। कई बार वार्डन और जिम्मेदार अधिकारियों को इसकी शिकायत की जा चुकी है, लेकिन आज तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। ऐसे में हर रात छात्रों को इस डर के साथ सोना पड़ता है कि कहीं कोई जहरीला जीव उनकी जिंदगी पर हमला न कर दे।

हालात इतने खराब हैं कि छात्रावास की कंप्यूटर लैब भी महज दिखावा बनकर रह गई है। लैब में केवल एक पुराना कंप्यूटर रखा है, जिसमें न कीबोर्ड है और न ही माउस। पूरा कमरा धूल और गंदगी से अटा पड़ा है। बिजली और अन्य बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव है। वहीं शौचालयों की स्थिति भी बेहद दयनीय है, जिससे छात्रों को रोजाना भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

छात्र बताते हैं कि करीब छह महीने पहले उन्होंने मुख्यमंत्री जनदर्शन कार्यक्रम में पहुंचकर अपनी समस्याएं रखी थीं। उम्मीद थी कि उनकी आवाज सत्ता के गलियारों तक पहुंचेगी और हालात सुधरेंगे। लेकिन आज भी फाइलें एक विभाग से दूसरे विभाग के बीच घूम रही हैं और छात्र उसी जर्जर भवन में रहने को मजबूर हैं। आश्वासन मिलते रहे, समाधान नहीं।

सबसे चिंताजनक बात यह है कि भवन की स्थिति किसी बड़े हादसे को न्योता दे रही है। छत और छज्जों के हिस्से कभी भी गिर सकते हैं, जिससे छात्रों की जान खतरे में पड़ सकती है। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारी मूकदर्शक बने हुए हैं।

सवाल यह है कि जब राजधानी में स्थित एक सरकारी छात्रावास की यह हालत है, तो दूर-दराज के क्षेत्रों में शिक्षा सुविधाओं की वास्तविक स्थिति क्या होगी? सरकार 2047 के विकसित छत्तीसगढ़ का सपना दिखा रही है, लेकिन वर्तमान में प्रदेश के युवा जर्जर इमारतों में अपनी जिंदगी दांव पर लगाकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं। क्या किसी बड़े हादसे के बाद ही प्रशासन की नींद खुलेगी, या फिर इन छात्रों का भविष्य यूं ही उपेक्षा के मलबे तले दबा रहेगा?

Related News

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *