नई दिल्ली: दिल्ली की अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने और युवाओं के लिए रोजगार के नए द्वार खोलने के उद्देश्य से दिल्ली सरकार ने एक व्यापक मास्टरप्लान तैयार किया है। इस योजना के तहत राजधानी में तीन नए ग्रीनफील्ड इंडस्ट्रियल एस्टेट विकसित किए जाएंगे, जिनका कुल क्षेत्रफल 1143 एकड़ होगा। इन आधुनिक औद्योगिक परिसरों के माध्यम से दिल्ली को एक उन्नत और पर्यावरण के अनुकूल इंडस्ट्रियल हब बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
सरकार की इस योजना का सबसे बड़ा केंद्र उत्तर-पश्चिम दिल्ली का कंझावाला क्षेत्र होगा, जहां 915 एकड़ भूमि पर विशाल औद्योगिक क्षेत्र विकसित किया जाएगा। यह राजधानी के अब तक के सबसे बड़े औद्योगिक क्षेत्रों में से एक होगा। इन क्षेत्रों को विकसित करने के लिए कैबिनेट नोट तैयार कर लिया गया है, जिसकी विस्तृत जानकारी दिल्ली आर्थिक सर्वेक्षण 2026 में भी साझा की गई है।
इन ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट्स की मुख्य विशेषता इनका पर्यावरण के अनुकूल होना है। दिल्ली के मौजूदा पुराने औद्योगिक क्षेत्रों में जगह की कमी और प्रदूषण की चुनौतियों को देखते हुए नए क्षेत्रों को जीरो एमिशन जोन के रूप में विकसित किया जाएगा। यहां मुख्य रूप से आधुनिक और स्वच्छ तकनीकों जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, इलेक्ट्रिक व्हीकल, इलेक्ट्रॉनिक्स, बायोटेक्नोलॉजी और आईटी सेवाओं से जुड़े उद्योगों को प्राथमिकता दी जाएगी।
इन नए केंद्रों को विकसित करने के पीछे का उद्देश्य मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को आधुनिक बनाना और बड़े पैमाने पर निवेश आकर्षित करना है। इन्हें पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे और प्रमुख हाईवे के करीब बनाया जा रहा है ताकि लॉजिस्टिक्स और परिवहन सुगम हो सके। सरकार का मानना है कि इन परियोजनाओं से न केवल मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को मजबूती मिलेगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों में भी तेजी आएगी।