लाल किला मैदान में जुटा आदिवासी समाज, CM विष्णुदेव साय बोले- “संस्कृति से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं”

नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किला मैदान में आयोजित जनजातीय महा समागम में देशभर से आदिवासी समाज के हजारों लोग शामिल हुए। कार्यक्रम में विष्णुदेव साय भी पहुंचे। भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के अवसर पर आयोजित इस सम्मेलन में डी-लिस्टिंग कानून और धर्मांतरण के मुद्दे सबसे ज्यादा चर्चा में रहे।

जनजातीय सुरक्षा मंच (JSM) के बैनर तले आयोजित इस कार्यक्रम में गुजरात, छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश और पूर्वोत्तर राज्यों से बड़ी संख्या में आदिवासी समुदाय के लोग दिल्ली पहुंचे। कई समूह पारंपरिक वेशभूषा और लोक वाद्ययंत्रों के साथ रैली निकालते हुए कार्यक्रम स्थल तक पहुंचे।

मीडिया से बातचीत में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि यह सिर्फ एक सम्मेलन नहीं, बल्कि आदिवासी पहचान और संस्कृति को बचाने का अभियान है। उन्होंने कहा कि देश में 12 करोड़ से ज्यादा जनजातीय समाज के लोग हैं और सभी अपनी परंपराओं, रीति-रिवाजों और संस्कृति की रक्षा के लिए एकजुट हो रहे हैं।

मुख्यमंत्री साय ने आरोप लगाया कि कुछ ताकतें जनजातीय संस्कृति को कमजोर करने की कोशिश कर रही हैं। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज अब अपनी पहचान के साथ किसी तरह का समझौता नहीं करेगा। उन्होंने डी-लिस्टिंग कानून लागू करने की मांग को भी जरूरी बताया।

सम्मेलन में शामिल संगठनों का कहना है कि जो लोग धर्म परिवर्तन कर चुके हैं और पारंपरिक आदिवासी जीवनशैली से अलग हो गए हैं, उन्हें अनुसूचित जनजाति (ST) श्रेणी का लाभ नहीं मिलना चाहिए। उनका तर्क है कि ST आरक्षण आदिवासी संस्कृति और सामाजिक संरचना की सुरक्षा के लिए दिया गया था।

कार्यक्रम में कई वक्ताओं ने आदिवासी क्षेत्रों में बढ़ते धर्मांतरण और सांस्कृतिक बदलाव पर चिंता जताई। आयोजकों ने दावा किया कि यह हाल के वर्षों का सबसे बड़ा Tribal Convention और Tribal Rights Gathering साबित हो सकता है।

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