रायगढ़ : छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले से एक बेहद भावुक और दुखद खबर सामने आई है। यहाँ छाल वन परिक्षेत्र में बीती रात तालाब में नहाने के दौरान एक बड़ा हादसा हो गया। पानी में मस्ती करते समय एक बड़े हाथी के नीचे दबने से हाथी के नवजात बच्चे (शावक) की दर्दनाक मौत हो गई। इस हादसे के बाद से पूरे इलाके में हाथियों का दल गुस्से में है। घटना की जानकारी मिलते ही वन विभाग (Forest Department Chhattisgarh) की टीम मौके पर पहुंच गई है।
आधी रात को तालाब किनारे गूंजती रही हाथियों की चिंघाड़
यह दर्दनाक वाकया छाल रेंज के पुसल्दा गांव का है। ग्रामीणों से मिली जानकारी के मुताबिक, इलाके में पिछले कई दिनों से करीब 70 हाथी अलग-अलग झुंड में घूम रहे हैं। शनिवार रात करीब 8 बजे हाथियों का एक दल आमामुड़ा तालाब में नहाने उतरा था। इसी दौरान गहरे पानी में एक भारी-भरकम हाथी का पैर शावक पर पड़ गया, जिससे वह नीचे दब गया और उसकी सांसें थम गईं।
शावक की मौत के बाद बेबस मादा हाथी ने खुद अपने बच्चे के शव को सूंड से खींचकर पानी से बाहर निकाला। इसके बाद पूरी रात हाथियों का दल तालाब के किनारे खड़े होकर चीखता-चिंघाड़ता रहा।
शव को घेरे खड़ा है दल, नहीं पहुंच पा रही डॉक्टरों की टीम
सुबह होने के बाद भी हाथियों का गुस्सा शांत नहीं हुआ है। दल के सदस्य मृत बच्चे के शव को चारों तरफ से घेरकर खड़े हैं। इस वजह से मौके पर पहुंची वन विभाग और डॉक्टरों की टीम (Wildlife Veterinary Team) चाहकर भी शावक के शव तक नहीं पहुंच पा रही है। अफसरों का कहना है कि जैसे ही हाथियों का यह झुंड जंगल की तरफ लौटेगा, वैसे ही शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम (Elephant Postmortem Process) की कार्रवाई शुरू की जाएगी।
5 महीने में 8 शावकों की मौत, उठे गंभीर सवाल
इस नई घटना ने वन विभाग की सुरक्षा और मॉनिटरिंग पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। रायगढ़ जिले में पिछले महज 5 महीनों के भीतर अलग-अलग रेंजों में 8 हाथी शावकों की मौत हो चुकी है। वन्यजीव प्रेमियों का कहना है कि हाथियों के कुनबे में बच्चों की लगातार हो रही मौतें बेहद गंभीर और चिंता का विषय हैं।