मौत की सजा बरकरार, अहमदाबाद ब्लास्ट के गुनाहगारों पर कोर्ट का कड़ा फैसला

गुजरात हाई कोर्ट ने साल 2008 में हुए अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट मामले में एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने निचली अदालत के उस निर्णय को बरकरार रखा है जिसमें 38 दोषियों को फांसी की सजा सुनाई गई थी। इस फैसले ने दशकों पुराने इस मामले में न्याय की दिशा स्पष्ट कर दी है।

लंबी चली कानूनी लड़ाई

अहमदाबाद सिटी सेशंस कोर्ट ने 18 फरवरी 2022 को इस मामले में अपना फैसला सुनाया था। कुल 78 आरोपियों के खिलाफ चले इस मुकदमे में 49 लोगों को दोषी माना गया था। इनमें से 38 दोषियों को मौत की सजा और 11 को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी, जबकि 29 आरोपियों को सबूतों की कमी के चलते बरी कर दिया गया था। कानूनी प्रक्रिया के तहत राज्य सरकार ने सजा की पुष्टि के लिए हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। साथ ही, सजा पाने वाले दोषियों ने भी हाई कोर्ट में अपील की थी।

फैसले की मुख्य बातें

अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों और सबूतों को सुनने के बाद अपना अंतिम निर्णय सुनाया है। हाई कोर्ट ने न केवल निचली अदालत की सजा को सही ठहराया है, बल्कि राज्य सरकार की याचिका पर मुहर लगाते हुए मौत की सजा को बरकरार रखा है। 2009 में शुरू हुई यह कानूनी प्रक्रिया 13 साल के लंबे संघर्ष के बाद निचली अदालत के फैसले तक पहुंची थी, जिसे अब हाई कोर्ट ने भी अपनी मंजूरी दे दी है।

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