कोका कोला की बटलर कंपनी में ऐसे हुआ दो करोड़ का घोटाला : ये कारिंदे गए जेल

आगरा। ताजनगरी आगरा में कोका कोला और उससे जुड़े अन्य पेय पदार्थों को बनाने और बेचने वाली नामचीन कंपनी वृंदावन एग्रो इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड और उसकी सहयोगी कंपनी एसएलएमजी बेवरेजेस प्राइवेट लिमिटेड में धोखाधड़ी और डेटा चोरी का एक बहुत बड़ा मामला सामने आया है। कंपनी के लीगल मैनेजर यानी कानूनी मामलों के प्रबंधक की लिखित शिकायत के बाद आगरा के पुलिस कमिश्नर के निर्देश पर हरीपर्वत थाने में केस दर्ज किया गया है। यह मुकदमा कंपनी के ही दो पूर्व बड़े अधिकारियों, पूर्व सेल्स मैनेजर जसप्रीत पुरी और पूर्व एरिया सेल्स मैनेजर भरत कुमार जैन के खिलाफ दर्ज हुआ है। इन दोनों पर एक संगठित गिरोह बनाकर कंपनी के साथ विश्वासघात, धोखाधड़ी और पैसों के गबन का आरोप है।

विश्वास जीतकर शर्तों का उड़ाया मजाक

दर्ज मामले के मुताबिक आरोपी जसप्रीत पुरी ने करीब 12 साल 9 महीने और भरत कुमार जैन ने 10 साल 7 महीने तक कंपनी में अपनी सेवाएं दी थीं। इतने लंबे समय तक काम करने की वजह से इन दोनों अधिकारियों ने कंपनी के सभी बड़े वितरकों, दुकानदारों और ग्राहकों के साथ बहुत गहरे व्यापारिक संबंध बना लिए थे। आरोप है कि दोनों ने नौकरी ज्वाइन करते समय साइन किए गए नियुक्ति पत्र की गोपनीयता शर्तों का सरेआम उल्लंघन किया। भरत कुमार जैन ने अप्रैल 2025 में इस्तीफा देकर तुरंत पवन एंटरप्राइजेज नाम की एक नई फर्म खोल ली। वहीं जसप्रीत पुरी ने भी जुलाई 2025 में नौकरी छोड़ने के बाद जैज एंटरप्राइजेज नाम की अपनी एक नई कंपनी रजिस्टर्ड करवा ली।

लैपटॉप से कंपनी का पूरा रिकॉर्ड किया साफ

कंपनी का आरोप है कि दोनों पूर्व प्रबंधकों ने एक सोची-समझी साजिश के तहत कंपनी के आधिकारिक लैपटॉप से डिस्ट्रीब्यूटर्स यानी थोक व्यापारियों और ग्राहकों का बेहद गोपनीय डेटा और व्यापारिक रिकॉर्ड पूरी तरह से डिलीट कर दिया। ऐसा इसलिए किया गया ताकि कंपनी उस डेटा को दोबारा हासिल न कर सके। इसके बाद आरोपियों ने इसी चुराए गए डेटा का इस्तेमाल कर हाथरस रोड और मलपुरा इलाके में बड़े-बड़े गोदाम खोल लिए। वहां दूसरी जगहों से लाया गया प्रतिबंधित माल भारी मात्रा में जमा करके समानांतर व्यापार शुरू कर दिया गया, जिससे पुरानी कंपनी को सीधे तौर पर नुकसान पहुंचाया जा सके।

फर्जी तरीके से किया 68 लाख से अधिक का गबन

पुलिस को दी गई शिकायत में वित्तीय धोखाधड़ी का भी बड़ा खुलासा हुआ है। आरोप है कि जसप्रीत पुरी ने मथुरा के एक बड़े डिस्ट्रीब्यूटर से मिले माल के ऑर्डर की सप्लाई तो कंपनी से करवा दी, लेकिन बदले में मिले 29,43,202 रुपये की रकम को कंपनी के बैंक खाते में जमा ही नहीं किया। इसके अलावा दोनों आरोपियों ने कंपनी के एक और पूर्व कर्मचारी वैभव सचदेवा और कुछ अन्य साथियों के साथ मिलकर एक गिरोह की तरह काम किया। नियमों के अनुसार किसी भी थोक व्यापारी को कोई विशेष छूट या क्लेम देने के लिए कंपनी के सबसे बड़े अधिकारियों से ईमेल पर लिखित मंजूरी लेना जरूरी होता था। लेकिन आरोपियों ने जाली ईमेल तैयार करके कंपनी को 68 लाख रुपये से अधिक का चूना लगा दिया। फिलहाल पुलिस मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच में जुट गई है।

Related News

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *