नया जिला बने तीन साल से ज्यादा बीते, लेकिन अब तक नहीं हो सका रेडक्रॉस सोसायटी का गठन

सक्ती। छत्तीसगढ़ का नवगठित जिला ‘सक्ती’ (शक्ति) प्रशासनिक रूप से अस्तित्व में आए तीन साल से अधिक का समय पूरा कर चुका है। लेकिन विडंबना देखिए कि जिले में अब तक भारतीय रेडक्रॉस सोसायटी (Indian Red Cross Society) का गठन नहीं हो पाया है। इसके चलते जिले के जरूरतमंदों, मरीजों और आपदा पीड़ितों को मिलने वाली त्वरित राहत और स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं।

कागजों से बाहर नहीं निकल पाई प्रक्रिया
नया जिला बनने के बाद स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य और सामाजिक सरोकारों को मजबूती देने के लिए रेडक्रॉस सोसायटी का गठन अनिवार्य होता है। नियमों के मुताबिक, कलेक्टर की अध्यक्षता में इस समिति का गठन होना चाहिए, जिसमें स्थानीय जनप्रतिनिधियों, समाजसेवियों और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को शामिल किया जाता है। लेकिन सक्ती जिले में प्रशासनिक उदासीनता के कारण यह प्रक्रिया तीन साल बाद भी ठंडे बस्ते में है।

क्यों जरूरी है रेडक्रॉस? क्यों हो रही है परेशानी:
रक्तदान और ब्लड बैंक: रेडक्रॉस का गठन न होने से जिले में बड़े पैमाने पर स्वैच्छिक रक्तदान शिविरों का आयोजन और ब्लड बैंक के सुचारू संचालन में दिक्कतें आ रही हैं।

मरीजों को आर्थिक मदद: गंभीर बीमारी से जूझ रहे गरीब मरीजों को इलाज, दवाई और एम्बुलेंस सेवा के लिए जो तात्कालिक आर्थिक सहायता रेडक्रॉस फंड से मिलती है, उससे जिले के लोग वंचित हैं।

आपदा में राहत: बाढ़, आगजनी या अन्य किसी दैवीय आपदा के समय पीड़ितों को तुरंत राहत सामग्री पहुंचाना रेडक्रॉस के मुख्य कार्यों में से एक है, जो यहाँ ठप है।

पड़ोसी जिलों पर निर्भर रहने की मजबूरी
स्थानीय नागरिकों और समाजसेवियों का कहना है कि छोटी-मोटी आपातकालीन सहायताओं के लिए भी आज भी सक्ती जिले के लोगों को जांजगीर-चांपा या रायगढ़ जिले की तरफ देखना पड़ता है। जिला बनने के बाद जनता को उम्मीद थी कि बुनियादी सुविधाएं उनके घर के पास मिलेंगी, लेकिन रेडक्रॉस जैसी महत्वपूर्ण संस्था का न होना प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है।

“क्या कहते हैं जिम्मेदार?”
इस संबंध में जब स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों से बात की गई, तो उनका कहना है कि प्रशासन को इस ओर तत्काल ध्यान देना चाहिए। जिला स्तर पर रेडक्रॉस की कमिटी बनने से न सिर्फ स्वास्थ्य व्यवस्था मजबूत होगी, बल्कि युवाओं में सामाजिक सेवा और रक्तदान के प्रति जागरूकता भी बढ़ेगी।

अब देखने वाली बात होगी कि तीन साल की इस लंबी सुस्ती के बाद सक्ती जिला प्रशासन कब जागता है और कब यहाँ के लोगों को रेडक्रॉस सोसायटी की सेवाओं का लाभ मिलना शुरू होता है।

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