कृषि उपज की सुरक्षा पर मंडी प्रशासन चुप्प, आवारा मवेशी बन रहे किसानों की परेशानी

राजकुमार मल

भाटापारा- हलाकान हैं किसान, परेशान हैं मिलर्स और ट्रेडर्स स्ट्रीट एनिमल्स से, जो कृषि उपज को नुकसान पहुंचा रहे हैं। नाराजगी बढ़ रही है उस मंडी प्रशासन की कार्य शैली को देखकर, जिस पर व्यवस्थागत खामियां दूर करने की जिम्मेदारी है।

बढ़ने लगी है दलहन और तिलहन फसल की आवक। इसके साथ बढ़ रही है घुमंतू मवेशियों की आवाजाही। प्रांगण में नीलाम के लिए ढेर की गई यह उपज सहज में ही बे- रोकटोक निशाना बन रहीं हैं। नुकसान किसान और व्यापारियों को ही उठाना पड़ रहा है।

पहला निशाना इन पर

तिवरा, बटरी, अरहर और चना। दलहन की इन फसलों की उपज प्रांगण में पहुंचने लगी है। सीजन है , ऐसे में कीमत बढ़ी हुई है लेकिन सुरक्षा के कोई इंतजाम प्रांगण में नजर नहीं आ रहे हैं। ऐसे में यह उपज सहज ही घुमंतू मवेशियों को मिल जा रहे हैं। नीलाम के शुरुआत से लेकर भराई तक इस परेशानी से किसान और कारोबारी जूझ रहे हैं।

नजर में यह भी

समर्थन मूल्य पर धान की खरीदी बंद हो चुकी है लेकिन शेष धान की आवक का प्रवाह बराबर बना हुआ है। मात्रा भले ही कमजोर हो लेकिन मवेशियों से प्रांगण में पहुंची यह उपज भी बचा पाने में असफल नजर आ रहा है मंडी प्रशासन। ऐसे में किसान ही जैसे- तैसे अपनी उपज की सुरक्षा कर रहे हैं।

निर्बाध प्रवेश

सुगम आवाजाही के लिए 7 बड़े द्वार हैं। यह स्ट्रीट एनिमल के लिए भी खुले हुए हैं। सुरक्षा गार्ड्स की मौजूदगी के बावजूद प्रागंण तक मवेशियों की पहुंच यह बताती है कि जिम्मेदारी सही ढंग से नहीं निभाई जा रही है। इसका खामियाजा किसान,मिलर्स और ट्रेडर्स को भुगतना पड़ रहा है।

खामियां दूर कर रहें हैं

प्रांगण में आवारा मवेशियों के पहुंचने की जानकारी है। समस्या दूर करने के प्रयास किये जा रहे हैं।
– सी एल ध्रुव, सचिव, कृषि उपज मंडी, भाटापारा

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