‘संकल्प’ या संदेह? छत्तीसगढ़ के बजट पर एक संतुलित पड़ताल

-सुभाष मिश्र

वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 1.72 लाख करोड़ का ‘संकल्पÓ बजट विधानसभा में पेश होते ही छत्तीसगढ़ की राजनीति गर्मा गई है। वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने इसे समावेशी विकास, अधोसंरचना विस्तार और निवेश उन्मुख अर्थव्यवस्था की दिशा में निर्णायक कदम बताया, वहीं पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने इसे आंकड़ों का मायाजाल करार दिया। सत्ता पक्ष इसे प्रदेश की नई विकास गाथा की शुरुआत बता रहा है, तो विपक्ष इसे जमीन से कटा हुआ दस्तावेज कह रहा है।
कुल बजट में 1.45 लाख करोड़ राजस्व व्यय और 26,500 करोड़ पूंजीगत व्यय का प्रावधान है। सरकार का जोर इस बात पर है कि पूंजीगत खर्च बढ़ाने से सड़क, अस्पताल, स्कूल और औद्योगिक ढांचा मजबूत होगा। केंद्र से पूंजी निवेश के लिए विशेष सहायता 4,000 करोड़ से बढ़ाकर 8,500 करोड़ करना भी इसी रणनीति का हिस्सा है। राजकोषीय घाटा जीएसडीपी के 2.87 प्रतिशत पर सीमित रखने का दावा वित्तीय अनुशासन का संकेत देता है। आम भाषा में कहें तो सरकार खर्च भी बढ़ाना चाहती है और कर्ज की सीमा भी नियंत्रित रखना चाहती है।
व्यय का 40 प्रतिशत सामाजिक क्षेत्र—शिक्षा, स्वास्थ्य और महिला-बाल कल्याण पर, 36 प्रतिशत आर्थिक गतिविधियों कृषि, उद्योग, रोजगार पर और 24 प्रतिशत प्रशासनिक मदों पर रखा गया है। ग्रीन बजट के तहत 14,300 करोड़ का प्रावधान राज्य की वन संपदा और पर्यावरणीय पहचान को ध्यान में रखकर किया गया बताया गया है। वन संरक्षण, वन्यजीव प्रबंधन और इलेक्ट्रिक वाहनों पर सब्सिडी जैसी घोषणाएं यह संकेत देती है कि विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन साधने की कोशिश की जा रही है, हालांकि खनन आधारित औद्योगिक विस्तार के साथ यह संतुलन कैसे कायम रहेगा, यह आगे स्पष्ट होगा।
बस्तर, सरगुजा और पूर्व नक्सल प्रभावित क्षेत्रों को बजट में विशेष प्राथमिकता दी गई है। अबूझमाड़ और जगरगुंडा में दो एजुकेशन सिटी स्थापित करने के लिए 100 करोड़ का प्रावधान, बस्तर फाइटर्स में 1500 नए पद, इंद्रावती नदी पर 2024 करोड़ की लागत से बैराज और 32 हजार हेक्टेयर अतिरिक्त सिंचाई की योजना सरकार की उस रणनीति को दर्शाती है जिसमें सुरक्षा और विकास को साथ लेकर चलने की बात कही जा रही है। बस्तर ओलंपिक और बस्तर पंडुम जैसे आयोजनों के लिए समर्थन स्थानीय संस्कृति को मुख्यधारा से जोडऩे का प्रयास माना जा रहा है।

स्वास्थ्य ढांचे के विस्तार पर भी जोर दिखाई देता है। जगदलपुर में सुपर स्पेशलिटी अस्पताल, दंतेवाड़ा में मेडिकल कॉलेज और मेडिकल सिटी, रायपुर में 200 बिस्तरों का नया अस्पताल और मदर-चाइल्ड हॉस्पिटल, चिरमिरी में जिला अस्पताल तथा राज्य का पहला होम्योपैथी कॉलेज ये घोषणाएं दूरस्थ और आदिवासी क्षेत्रों तक बेहतर इलाज पहुंचाने के दावे के साथ की गई हैं। कर्मचारियों के लिए कैशलेस चिकित्सा योजना और शहीद वीर नारायण सिंह आयुष्मान योजना के तहत 5 लाख तक इलाज का प्रावधान सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में कदम बताया गया है।
कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए कृषक उन्नति योजना में 10,000 करोड़, कृषि पंपों के लिए 5,500 करोड़ और भूमिहीन परिवारों के लिए 600 करोड़ का प्रावधान किया गया है। बस्तर और सरगुजा में एग्रो-फॉरेस्ट प्रोसेसिंग, राइस मिल और पोल्ट्री फार्म को बढ़ावा देने की योजना स्थानीय रोजगार सृजन की दिशा में पहल के रूप में देखी जा रही है। हालांकि, विपक्ष का आरोप है कि धान खरीदी के आंकड़ों में गिरावट किसानों के साथ अन्याय को दर्शाती है और बजट में इसका ठोस समाधान नहीं है।
महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन पर 50 प्रतिशत छूट, रानी दुर्गावती योजना के तहत बालिकाओं को 18 वर्ष की आयु पर 1.5 लाख की सहायता, लखपति दीदी भ्रमण योजना और 250 महतारी सदनों के निर्माण की घोषणा सामाजिक सशक्तिकरण के संकेत हैं। शिक्षा और युवा क्षेत्र में नई नालंदा लाइब्रेरी, ओबीसी छात्राओं के लिए छात्रावास, नवा रायपुर में राष्ट्रीय तीरंदाजी अकादमी और आधुनिक स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, क्रीड़ा प्रोत्साहन योजना के लिए राशि, ये सब युवाओं को अवसर देने के दावे के साथ पेश किए गए हैं। फिर भी विपक्ष का कहना है कि सरकारी नौकरियों की स्पष्ट रूपरेखा और भर्ती कैलेंडर के बिना युवाओं को भरोसा नहीं मिलेगा।
सड़क और अधोसंरचना के लिए प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में 1700 करोड़, मुख्यमंत्री सड़क योजना में 200 करोड़ और उद्योग विभाग का बजट बढ़ाकर 1750 करोड़ किया गया है। नवा रायपुर से राजनांदगांव तक इंडस्ट्रियल कॉम्प्लेक्स और एयरपोर्ट पर स्थानीय उत्पादों के शोरूम जैसी घोषणाएं निवेश और ब्रांडिंग की रणनीति का हिस्सा बताई जा रही हैं। सरकार ने संकल्प के सात सूत्र—समावेशी विकास, अधोसंरचना, निवेश, कुशल मानव संसाधन, अंत्योदय, आजीविका और नीति से परिणाम—को बजट की मूल भावना बताया है और अधोसंरचना, एआई, पर्यटन, स्टार्टअप तथा खेल उत्कर्ष के पांच मुख्यमंत्री मिशन मिशन मोड में लागू करने की घोषणा की है।
विपक्ष का आरोप है कि यह सब घोषणाएं ज्यादा हैं और ठोस नई पहल कम। उनका कहना है कि ‘मोदी की गारंटीÓ का स्पष्ट रोडमैप नजर नहीं आता, पीएम आवास की राशि अपर्याप्त है और रेलवे परियोजनाएं आम जनता से अधिक खनिज परिवहन के लिए हैं। सरकार इन आरोपों को राजनीतिक करार देती है और कहती है कि यह बजट अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक विकास पहुंचाने का दस्तावेज है।
अब नजर इस बात पर रहेगी कि कागज पर दर्ज ये प्रावधान कितनी तेजी और पारदर्शिता से जमीन पर उतरते हैं, क्योंकि आम नागरिक के लिए बजट की असली परीक्षा आंकड़ों में नहीं, बल्कि उसके रोजमर्रा के जीवन में दिखने वाले बदलाव में होती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *