छत्तीसगढ़ के बस्तर से लेकर जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, तेलांगना तक पानी का सैलाब आया हुआ है। कहीं बादल फटने से पहाड़ खिसक रहे हैं तो कहीं नदी अपना तटबंध तोड़कर आसपास के इलाके को जलमग्न कर रही। पुराने पुल-पुलिये बाढ़ के सामने भर-भराकर जमींदोज हो रहे हैं। जनधन के साथ बड़े पैमाने पर नदी, पहाड़ के किनारे रहने वालों के सामने बड़ा संकट उपस्थित हो गया है। विडंबना यह है कि जो इलाके गर्मी में भीषण पेयजल संकट से जूझते हैं, बरसात आते ही जलमग्न होकर बाढ़ से बचाव के उपाय करते हैं। हमारे देश में ठीक ढंग से जल संरक्षण का प्रबंध नहीं होने के कारण यह स्थिति निर्मित हो रही है।
जम्मू-कश्मीर में बाढ़ और बारिश से वैष्णो देवी हादसे में अब तक 41 की मौत हो चुकी है। जम्मू कश्मीर, पंजाब और हिमाचल में बारिश ने जमकर कहर बरपाया है। जम्मू और कश्मीर में कटरा के पास वैष्णो देवी मंदिर के पास भारी बारिश के कारण भूस्खलन हुआ है। इसका कारण सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ था और उसके अलावा बंगाल की खाड़ी से हवाएं आ रही थीं। बारिश के बाद पंजाब की हालत खराब हैं। वहीं बाढ़ से निपटने के लिए सरकार, पंजाब के मुख्यमंत्री, पूरा केबिनेट, प्रशासन और आम लोग भी सतर्कता के साथ काम कर रहे हैं। जम्मू-कश्मीर कटरा के होटल मालिकों ने वहां फंसे हुए श्रद्धालुओं को रहने के लिए मुफ्त में रूम देने की पेशकश की है। जम्मू में भारी बारिश से भारी नुकसान हुआ है। रेलवे ट्रैक और पुल बाढ़ की चपेट में हैं। ट्रेन सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुई हैं, जिससे सैकड़ों यात्री जम्मू रेलवे स्टेशन पर फंसे हुए हैं। इनमें से ज़्यादातर यात्री कटरा स्थित श्री माता वैष्णो देवी मंदिर से लौट रहे तीर्थयात्री हैं।
बस्तर में इंद्रावती नदी का जलस्तर बढऩे के बाद मांदर गांव में बाढ़ का पानी घुसा गया। घर की छत पर फंसे 6 लोगों को हेलीकॉप्टर से निकाला गया। वायुसेना के हेलीकॉप्टर से अब तक 68 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित जगह पर पहुंचाया गया। बाढ़ की स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन ने वायुसेना से मदद मांगी थी। जगदलपुर-सुकमा मार्ग पर दरभा घाटी के पास उफनते नाले को पार करने के दौरान एक कार बह गई। हादसे में कार सवार पति-पत्नी और दो बच्चों की मौत हो गई। इससे पहले बीजापुर के भैरमगढ़ स्थित सीआरपीएफ 165वीं बटालियन के मुख्यालय में इंद्रावती नदी का जलस्तर बढऩे से पानी घुस गया। सुकमा में लगातार बारिश से शबरी नदी उफान पर है। कई जगहों पर भारी बारिश हो सकती है। बीजापुर, दंतेवाड़ा, बस्तर और कोंडागांव इन चार जिलों में भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट है। इसके अलावा सुकमा, नारायणपुर, कांकेर, धमतरी, गरियाबंद इन 5 जिलों में भारी बारिश का यलो अलर्ट है। कबीरधाम, बलौदाबाजार, रायपुर सहित सेंट्रल पार्ट के 9 जिलों में बिजली गिरने, बादल गरजने और आंधी चलने का अलर्ट है।
विदेश प्रवास में गए मुख्यमंत्री साय ने बस्तर संभाग में बाढ़ की स्थिति पर जायजा लिया। उन्होंने सीनियर अधिकारियों से फोन पर बात की। मुख्यमंत्री साय ने जापान से बस्तर संभाग के अधिकारियों से बातचीत कर राहत बचाव को लेकर आवश्यक दिशा निर्देश दिए। हेलीकॉप्टर और नाव से ग्रामीणों का रेस्क्यू किया जा रहा है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने एक्स हैंडल पर ट्वीट कर कहा कि बस्तर में बाढ़ की जानकारी मिलने पर मैंने राजस्व सचिव रीना बाबासाहेब कंगाले व बस्तर संभागायुक्त डोमन सिंह से दूरभाष पर चर्चा की और राहत एवं बचाव कार्य के संबंध में जानकारी ली।
पूरे भारत में बाढ़ की स्थिति वर्ष 2025 में भी गंभीर बनी हुई है, जिससे विभिन्न राज्यों में व्यापक नुकसान हो रहा है। बिहार में बाढ़ से 81 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं। महाराष्ट्र के पुणे मंडल में बाढ़ के कारण मरने वालों की संख्या बढ़कर 56 हो गई है। अगस्त के दूसरे सप्ताह में आई बाढ़ के कारण सांगली और कोल्हापुर प्रशासनिक मंडल के अंतर्गत पडऩे वाले पांच जिले और सोलापुर, पुणे एवं सतारा खंड के अन्य जिले बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। वहीं राजस्थान में बिपरजॉय चक्रवात के प्रभाव से तीन जिलों में बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न हुई है, जिसमें छह लोगों की मौत हो चुकी है। बाड़मेर, जालोर, और पाली जिलों में नदियों के उफान से कई गांव जलमग्न हो गए हैं और आवागमन बाधित हुआ है।
बाढ़ के कारण जान-माल की हानि के साथ-साथ कृषि, बुनियादी ढांचा, और पर्यावरण को भी गंभीर नुकसान हो रहा है। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, भारत में बाढ़ प्रतिवर्ष लगभग 75 लाख हेक्टेयर भूमि क्षेत्र को प्रभावित करती है और फसलों, घरों एवं सार्वजनिक उपयोगिताओं की क्षति के रूप में 1,805 करोड़ रुपये मूल्य की हानि का कारण बनती है।
भारत में बाढ़ की बिगड़ती स्थिति और उससे होने वाले नुक़सान को देखते हुए, यह आवश्यक है कि सरकारें और संबंधित एजेंसियां आपदा प्रबंधन की रणनीतियों को सुदृढ़ करें, पूर्वानुमान प्रणालियों को बेहतर बनाएं और प्रभावित क्षेत्रों में त्वरित राहत कार्य सुनिश्चित करें। साथ ही, बाढ़ के दीर्घकालिक प्रभावों को कम करने के लिए स्थायी समाधान खोजे जाएं।
प्रसंगवश दुष्यंत कुमार की ये पंक्तियां याद आती हैं-
बाढ़ की संभावनाएं सामने हैं
और नदियों के किनारे घर बने हैं
चीड़-वन में आंधियों की बात मत कर,
इन दरख्तों के बहुत नाजुक तने हैं।।
बाढ़ के पानी का प्रकोप, जान-माल की बड़ी क्षति

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