मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति में महा विकास अघाड़ी (MVA) गठबंधन को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। मानसून सत्र से पहले विपक्षी रणनीति तय करने के लिए बुलाई गई अहम बैठक में गठबंधन के 60 में से 23 विधायक शामिल नहीं हुए। कई वरिष्ठ नेताओं की गैरमौजूदगी ने भी राजनीतिक हलकों में चर्चाओं को तेज कर दिया है।
बैठक में शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने सहयोगी दलों की मौजूदगी और एकजुटता को लेकर खुलकर चिंता जताई। उन्होंने सवाल किया कि क्या महा विकास अघाड़ी वास्तव में एकजुट है या सिर्फ नाम के लिए साथ चल रही है।
बड़े नेताओं की अनुपस्थिति से बढ़ी अटकलें
बैठक में एनसीपी नेता शरद पवार, जयंत पाटिल और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता नाना पटोले शामिल नहीं हुए। हालांकि कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल और शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत मौजूद रहे।
सूत्रों के अनुसार, बड़ी संख्या में विधायकों की गैरहाजिरी को लेकर उद्धव ठाकरे ने नाराजगी भी जताई। उन्होंने कहा कि अगर गठबंधन को मजबूत रखना है तो सभी दलों को एक मंच पर आकर मुद्दों को मजबूती से उठाना होगा।
सांसदों के जाने के बाद बढ़ी चिंता
हाल ही में शिवसेना (UBT) के छह सांसदों ने पार्टी छोड़कर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना का दामन थाम लिया था। इसके बाद अब विधायकों की अनुपस्थिति को भी राजनीतिक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
उद्धव ठाकरे ने बैठक में कहा कि जो लोग जा चुके हैं, उन्हें जाने दें। अब जरूरत उन लोगों पर ध्यान देने की है जो गठबंधन के साथ खड़े हैं। उन्होंने कार्यकर्ताओं और नेताओं से एकजुट होकर काम करने की अपील की।
आगामी चुनावों से पहले चुनौती
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आगामी चुनावों से पहले MVA के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपनी एकता बनाए रखना है। कांग्रेस, शिवसेना (UBT) और एनसीपी के बीच बेहतर तालमेल ही गठबंधन की मजबूती तय करेगा। फिलहाल इस बैठक ने महाराष्ट्र की राजनीति में नए सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।