एनसीईआरटी की किताब में आपातकाल शामिल करने पर भड़की कांग्रेस: जयवर्धन सिंह ने भाजपा को कहा बेशर्म, पायलट बोले- इतिहास बदलने की हो रही कोशिश

नेशनल काउंसिल फॉर एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग यानी एनसीईआरटी द्वारा नौवीं कक्षा के पाठ्यक्रम में साल 1975 के आपातकाल को शामिल किए जाने के बाद देश में सियासी बवाल खड़ा हो गया है। बिलासपुर में नीट परीक्षा में हुई कथित गड़बड़ियों के खिलाफ कांग्रेस के देशव्यापी आंदोलन छात्रों की गूंज कार्यक्रम में शामिल होने रायपुर पहुंचे मध्य प्रदेश के पूर्व मंत्री और कांग्रेस विधायक जयवर्धन सिंह ने इस फैसले पर कड़ा गुस्सा जताया है। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि भाजपा अपनी गंदी राजनीति के लिए अब स्कूली बच्चों की किताबों का भी इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि कांग्रेस राजनीति जरूर करती है, लेकिन उसने कभी भी बच्चों के भविष्य और शिक्षा के साथ खिलवाड़ नहीं किया।

बीजेपी का ध्येय सिर्फ अपना फायदा देखना, सचिन पायलट का सरकार पर बड़ा हमला

एनसीईआरटी की किताबों में हुए इस बड़े बदलाव पर छत्तीसगढ़ कांग्रेस के प्रभारी सचिन पायलट ने भी सरकार को घेरा है। उन्होंने रायपुर में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि इतिहास को हर कोई अपने नजरिए से देख सकता है, लेकिन यह देखा गया है कि जहां भी भाजपा की सरकार आती है, वे किताबों और देश के इतिहास को अपने हिसाब से तोड़-मरोड़कर पेश करने लगते हैं। पायलट ने आरोप लगाया कि आज देश के भीतर संवैधानिक संस्थाओं का अपनी मर्जी से इस्तेमाल किया जा रहा है और ऐसा माहौल देश के इतिहास में पहले कभी नहीं देखा गया। उन्होंने कहा कि भाजपा केवल अपने राजनीतिक हितों को साधने के लिए इस तरह के हथकंडे अपना रही है।

सीबीएसई और नीट घोटाले को लेकर घेरा, पूछा- एनटीए को संसदीय अधिकार क्यों नहीं मिले

इसके साथ ही जयवर्धन सिंह ने देश में चल रहे नीट परीक्षा विवाद को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और मोदी सरकार पर तीखे सवाल दागे। उन्होंने कहा कि देश के इतिहास में पहली बार ऐसा हो रहा है कि बड़ी परीक्षाओं में इतने बड़े पैमाने पर पेपर लीक और घोटाले सामने आ रहे हैं। कांग्रेस नेता ने याद दिलाया कि उनकी पार्टी ने देश को आईआईटी, आईआईएम और एम्स जैसे बड़े और प्रतिष्ठित संस्थान दिए, जबकि मौजूदा सरकार ने देश के युवाओं को केवल नीट घोटाला और सीबीएसई की बदइंतजामी दी है। उन्होंने सरकार से सीधा सवाल पूछा कि जब नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी एनटीए का गठन किया गया था, तो उसे जरूरी संसदीय अधिकार और स्वायत्तता क्यों नहीं दी गई।

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