कांकेर। छत्तीसगढ़ के राजनीतिक गलियारे से एक बेहद दुखद और बड़ी खबर सामने आ रही है। राज्यमंत्री का दर्जा प्राप्त और छत्तीसगढ़ मछुआ कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष भरत मटियारा का निधन हो गया है। उन्होंने हैदराबाद के एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान अंतिम सांस ली। भरत मटियारा के अचानक निधन की खबर मिलते ही कांकेर समेत पूरे प्रदेश के भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं में शोक की लहर दौड़ गई है। सोशल मीडिया पर लोग उन्हें नम आंखों से श्रद्धांजलि दे रहे हैं।
महीने भर से चल रहे थे बीमार, रायपुर से हैदराबाद किए गए थे रेफर
पारिवारिक सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, मछुआ कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष भरत मटियारा को करीब एक महीने पहले अचानक स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्या आई थी। तबीयत बिगड़ने पर उन्हें तुरंत इलाज के लिए राजधानी रायपुर के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
रायपुर में शुरुआती उपचार के बाद भी जब उनकी सेहत में कोई खास सुधार नहीं हुआ, तो डॉक्टरों की सलाह पर उन्हें बेहतर इलाज के लिए हवाई मार्ग से हैदराबाद ले जाया गया। हैदराबाद के एक बड़े निजी अस्पताल में उनका डॉक्टरों की देखरेख में इलाज चल रहा था, लेकिन तमाम कोशिशों के बाद भी उन्हें बचाया नहीं जा सका।
कांकेर भाजपा के दो बार रहे जिलाध्यक्ष, क्षेत्र में थी गहरी पैठ
भरत मटियारा बस्तर संभाग और खासकर कांकेर जिले में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बेहद कद्दावर और जमीनी नेता माने जाते थे। उनके सांगठनिक कौशल को देखते हुए पार्टी ने उन्हें दो बार कांकेर भाजपा जिला अध्यक्ष की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी थी।
संगठन में उनके लंबे अनुभव और समाज के प्रति समर्पण को देखते हुए ही सरकार ने उन्हें दूसरी बार मछुआ कल्याण बोर्ड का अध्यक्ष नियुक्त करते हुए राज्यमंत्री का दर्जा दिया था। वे हमेशा आम लोगों के सुख-दुख में खड़े रहने वाले नेता के रूप में जाने जाते थे, यही वजह है कि उनकी क्षेत्र में गहरी पैठ थी।
पार्थिव देह लाई जाएगी कांकेर, अंतिम संस्कार की तैयारी शुरू
भरत मटियारा के निधन की खबर से कांकेर के उनके गृह निवास और पूरे क्षेत्र में सन्नाटा पसर गया है। भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं और मंत्रियों ने उनके निधन पर गहरा दुख जताते हुए इसे पार्टी और समाज के लिए एक अपूरणीय क्षति बताया है।
पारिवारिक सदस्यों के अनुसार, उनके पार्थिव शरीर को विशेष वाहन के जरिए हैदराबाद से उनके गृह ग्राम कांकेर लाया जा रहा है। शव के पहुंचने के बाद परिजनों और स्थानीय नेताओं की मौजूदगी में पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।