नई दिल्ली। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद ने कक्षा 9वीं की सामाजिक विज्ञान की नई किताब में कई अहम बदलाव किए हैं। सबसे ज्यादा चर्चा संविधान की प्रस्तावना को हटाए जाने और इमरजेंसी पर अलग से अध्याय जोड़ने को लेकर हो रही है। नई किताब में संविधान की प्रस्तावना प्रकाशित नहीं की गई है। वहीं समाजवादी और पंथनिरपेक्ष जैसे शब्दों का भी उल्लेख नहीं किया गया है।
नई किताब का नाम “अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड” रखा गया है। इसमें संविधान की चर्चा उसके निर्माण, लोकतांत्रिक संस्थाओं और मौलिक अधिकारों के जरिए की गई है। हालांकि प्रस्तावना में शामिल संप्रभु, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक और गणराज्य जैसे शब्दों की अलग से व्याख्या नहीं दी गई है।
इमरजेंसी को लोकतंत्र की बड़ी चुनौती बताया
नई किताब में वर्ष 1975 की इमरजेंसी पर अलग से विस्तृत अध्याय जोड़ा गया है। इसमें बताया गया है कि उस दौर में बेरोजगारी, महंगाई और सरकार के खिलाफ बढ़ते विरोध के बीच राष्ट्रीय आपातकाल लागू किया गया था। पुस्तक के अनुसार, इस दौरान कई मौलिक अधिकार सीमित कर दिए गए, प्रेस पर सेंसरशिप लगाई गई और कई विपक्षी नेताओं को गिरफ्तार किया गया।
किताब में यह भी कहा गया है कि वर्ष 1977 के आम चुनाव में जनता ने मतदान के जरिए अपना फैसला सुनाया और इसे भारतीय लोकतंत्र की मजबूती का उदाहरण बताया गया है।
जयप्रकाश नारायण आंदोलन का भी जिक्र
नई किताब में लोकनायक जयप्रकाश नारायण के आंदोलन को भी विस्तार से शामिल किया गया है। इसमें बताया गया है कि उन्होंने छात्रों और आम लोगों को संगठित किया, जिससे बिहार और गुजरात में बड़े जन आंदोलन खड़े हुए।
संविधान में अब भी मौजूद हैं ये शब्द
हालांकि नई किताब में समाजवादी और पंथनिरपेक्ष शब्दों का उल्लेख नहीं किया गया है, लेकिन ये दोनों शब्द भारतीय संविधान का हिस्सा बने हुए हैं। इन्हें वर्ष 1976 में 42वें संविधान संशोधन के जरिए प्रस्तावना में जोड़ा गया था। संविधान में इनका कानूनी दर्जा पहले की तरह बरकरार है।