रावघाट माइंस पर अवैध कटाई का आरोप, वन विभाग पर भी संलिप्त होने की आशंका
भानुप्रतापपुर। पूर्व वनमंडल अंतर्गत रावघाट लौह अयस्क परियोजना पिछले कुछ दिनों से सुर्खियों में है। जंगल क्षेत्र में सैकड़ों पेड़ों की कटाई कर रास्ता निर्माण किए जाने के मामले ने वन विभाग की नींदे उड़ा दी है। इतनी बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई कर रास्ता बनाने की जानकारी विभाग को ना होना कई प्रकार के संदेहों को जन्म दे रहा है। मामला उजागर होने के बाद वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की। प्रारंभिक जांच में यह सामने आया की सैकड़ों पेड़ो को अवैध रूप से काटा गया है तथा रास्ता बनाया गया है, जिसके लिए माइंस प्रबंधन ने विभाग से कोई अनुमति नहीं ली है। कार्यवाही के नाम पर विभाग ने एक वाहन की चाबी को जप्त किया है, जबकि वाहन को मालिक के सुपुर्द कर दिया गया है। मौके पर और भी वाहन थे जिन्हें वन विभाग ने बिना कार्यवाही के ही छोड़ दिया जिससे कई सवाल खड़े हो गए है।
जानकारी के अनुसार रावघाट माइंस से रेलवे स्टेशन तक लौह अयस्क परिवहन के लिए जंगल के भीतर लगभग दो किलोमीटर लंबा रास्ता बनाया गया है। इस दौरान दौरान बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई किए जाने की बात सामने आई। स्थानीय ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों ने आरोप है लगाया कि इसके लिए आवश्यक वन स्वीकृति प्राप्त नहीं की गई है, जिसके बाद यह मामला प्रकाश में आया। वन विभाग ने स्थल निरीक्षण कर पंचनामा तैयार किया जिसमे बताया गया कि सर्वे के अनुसार कुल 525 वृक्ष काटे गए है, जिसमे जलाऊ लड़की 16 चट्टा, 135 नग बल्ली, 51 नग लट्ठा शामिल है। कटाई होने वाले क्षेत्र का कुल रकबा लगभग 0.797 हेक्टेयर है। मौके पर 7 वाहन जिसमे आयरन ओर भरा हुआ पाया गया। वही एक वाहन जो लीज एरिया से बाहर पाया गया उसकी चाबी जप्त कर मालिक को वाहन सुपुर्द किया गया।

वनों को क्षति पहुँचाने पर क्षेत्र के लोगों में आक्रोश
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार संबंधित एजेंसी द्वारा केवल आवेदन प्रस्तुत किया गया था, जबकि पेड़ कटाई अथवा सड़क निर्माण के लिए औपचारिक अनुमति जारी नहीं की गई है। वन मंडलाधिकारी ने भी स्पष्ट किया है कि पेड़ों की कटाई के लिए किसी प्रकार की वैध अनुमति नहीं दी गई थी। उन्होंने बताया कि शिकायत के आधार पर मामले की जांच की जा रही है और जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। घटना को लेकर क्षेत्र में नाराजगी बढ़ रही है। ग्रामीणो का कहना है कि विकास और रोजगार के नाम पर जंगलों को नुकसान पहुंचाना उचित नहीं है। लोगों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। फिलहाल वन विभाग की जांच जारी है। जांच के निष्कर्षों पर सभी की नजरें टिकी हैं, क्योंकि यह मामला केवल पेड़ कटाई तक सीमित नहीं वल्कि पर्यावरण संरक्षण और विकास के बीच संतुलन से भी जुड़ा हुआ है।
रेंजर और एसडीओ को जारी हुआ नोटिस
रावघाट माइंस से सरगीपाल रेलवे स्टेशन तक लगभग 1.25 किमी लंबी सड़क वन भूमि पर अवैध रूप से बना दी गई है। इस पूरी सड़क को आकार देने जंगल के लगभग 525 हरे-भरे पेड़ों को बेरहमी से काट दिया गया। इस दौरान वन विभाग के बिट गार्ड, डिप्टी रेंजर व रेंजर को इस कार्य की भनक नहीं लगी या जान बुझ कर यह कृत्य होने दिया गया यह भी जांच का विषय है। फिलहाल रेंजर व एसडीओ को नोटिस देकर जवाब मांगा गया है। वही माइंस के संबंधित ठेकेदार पर एफआईआर और जुर्माने की कार्रवाई के साथ वन विभाग के बीट गार्ड और वन पाल पर सीधे निलंबन व दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।