रेशमा लहरे, बिलासपुर । न्यायधानी बिलासपुर में इन दिनों आवारा कुत्तों का खौफ सिर चढ़कर बोल रहा है। शहर की गलियों से लेकर मुख्य सड़कों तक आवारा कुत्तों का आतंक इस कदर बढ़ गया है कि लोगों का अकेले निकलना मुश्किल हो गया है। शहर के सबसे बड़े अस्पताल सिम्स (CIMS) से जो आंकड़े सामने आए हैं, वे बेहद डराने वाले हैं। सिम्स में हर दिन औसतन 20 से 25 लोग डॉग बाइट (कुत्तों के काटने) का शिकार होकर इलाज के लिए पहुंच रहे हैं।
हर महीने आ रहे 600 मामले, जिला अस्पताल में भी मरीजों की कतार
अगर आंकड़ों पर नजर डालें तो सिर्फ सिम्स अस्पताल में ही हर महीने करीब 600 डॉग बाइट के मामले दर्ज हो रहे हैं। इसके अलावा जिला अस्पताल में भी रोज 3 से 4 लोग इलाज कराने पहुंच रहे हैं। निजी अस्पतालों का हाल भी कुछ ऐसा ही है, जहां एंटी रेबीज इंजेक्शन (Anti Rabies Vaccine) लगवाने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
पिछले एक साल की बात करें तो सिम्स में रिकॉर्ड 7 हजार से ज्यादा डॉग बाइट के केस आए। वहीं, बीते तीन महीनों में जानवरों के हमले के 1700 से ज्यादा मामले सामने आए। इनमें से अकेले कुत्तों के काटने के 1625 मामले हैं। इसके अलावा 106 लोगों को बिल्लियों ने और 23 लोगों को बंदरों ने अपना शिकार बनाया है।
वैक्सीन की भारी मांग: 3 महीने में लगीं 7300 डोज, इमरजेंसी में मंगाया स्टॉक
मरीजों की बढ़ती तादाद के चलते अस्पतालों में एंटी रेबीज वैक्सीन की खपत तेजी से बढ़ गई है। सिम्स प्रबंधन के मुताबिक, पिछले तीन महीनों के भीतर ही अस्पताल में 7300 से ज्यादा वैक्सीन की डोज लोगों को लगाई जा चुकी हैं। अस्पताल में अचानक बढ़ी इस डिमांड के चलते दवाओं का स्टॉक कम पड़ने लगा था, जिसके बाद प्रबंधन को आपातकालीन स्थिति में 1000 अतिरिक्त वैक्सीन डोज का स्पेशल ऑर्डर देना पड़ा है।