रेशमा लहरे, बिलासपुर। कहने को तो बिलासपुर स्मार्ट सिटी बनने की राह पर है, लेकिन धरातल की सच्चाई कुछ और ही बयां कर रही है। इन दिनों न्यायधानी के लोग बुनियादी सुविधाओं के सबसे बुरे दौर से गुजर रहे हैं। शहर का एक बड़ा हिस्सा नल से आ रहे बदबूदार पानी से परेशान है, तो दूसरा हिस्सा अघोषित बिजली कटौती से जूझ रहा है। रही-सही कसर सड़कों पर घूम रहे आवारा कुत्तों ने पूरी कर दी है, जिससे लोगों का घर से निकलना दूभर हो गया है। भीषण गर्मी के इस मौसम में शहर की आधी आबादी पानी की एक-एक बूंद के लिए तरस रही है।
सरकंडा में फूट पड़ा गुस्सा: बंद करनी पड़ी मुख्य पाइपलाइन
शहर के सरकंडा इलाके में पिछले 6 दिनों से गंदे पानी का संकट बना हुआ है। लगातार आ रही शिकायतों के बाद नगर निगम के जल विभाग को आखिरकार नूतन चौक और अशोक नगर की तरफ जाने वाली मुख्य पाइपलाइन को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा है। इसके साथ ही मेलापारा-चांटीडीह लाइन की सप्लाई रोककर भी जांच शुरू कर दी गई है।
गुरुवार सुबह जब लोगों के घरों में नल खुले, तो फिर से मटमैला और बदबूदार पानी निकला। हालांकि, दोपहर तक पानी थोड़ा साफ जरूर हुआ, लेकिन लोग इसे पीने से डर रहे हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि इस पानी के इस्तेमाल से इलाके में उल्टी-दस्त और पीलिया जैसी बीमारियां फैलने का बड़ा खतरा बना हुआ है।
टैंकरों के भरोसे कट रही जिंदगी, बर्तनों के साथ कतार में खड़े लोग
गंदे पानी की सबसे ज्यादा मार सरकंडा के नेपाली मोहल्ला, ग्लैमरस ब्यूटी पार्लर वाली गली और अग्रवाल किराना स्टोर के पास वाले इलाके में पड़ी है। यहाँ हालात इतने खराब हो गए कि नगर निगम को आनन-फानन में दो टैंकर भेजकर पानी बंटवाना पड़ा।
स्थानीय निवासी के मुताबिक, सुबह से ही लोग हाथ में बाल्टी, डिब्बे और गुंड लेकर टैंकर के इंतजार में खड़े हो जाते हैं। जिनके घरों में निजी बोरिंग है, उनके यहाँ पड़ोसियों की भीड़ लगी हुई है। नगर निगम टैक्स तो पूरा लेता है, लेकिन पीने के लिए साफ पानी भी नसीब नहीं हो रहा है।”
अधिकारियों का दावा: फ्लशिंग का काम जारी, आज फिर होगी सप्लाई
नगर निगम के जल विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, पाइपलाइनों में कहाँ लीकेज है या गंदा पानी कहां से मिल रहा है, इसकी जांच के लिए फ्लशिंग (पाइपों की सफाई) की जा रही है। अधिकारियों ने दावा किया है कि मेलापारा लाइन से शुक्रवार को दोबारा पानी छोड़कर चेक किया जाएगा। जब तक समस्या पूरी तरह ठीक नहीं हो जाती, तब तक प्रभावित इलाकों में टैंकरों के जरिए पानी की सप्लाई जारी रहेगी।