सूरजपुर : जिले के रामानुजनगर थाना क्षेत्र का डगमला गांव इन दिनों किसी सामान्य ग्रामीण इलाके की तरह नहीं, बल्कि नशे के एक खतरनाक अड्डे के रूप में चर्चा में है। गांव की गलियों से लेकर चौपालों तक एक ही सवाल गूंज रहा है-आखिर मौत के इस कारोबार पर लगाम कब लगेगी? स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रतिबंधित नशीले इंजेक्शन और स्पास्मो प्रोक्सिवोन जैसे घातक कैप्सूल खुलेआम बेचे जा रहे हैं और यह सब पुलिस की आंखों के सामने हो रहा है।

ग्रामीणों के मुताबिक, हालात इतने भयावह हो चुके हैं कि अब गांव और आसपास के इलाकों के किशोर, स्कूल के छात्र और कॉलेज जाने वाले युवा तेजी से इस जहर की गिरफ्त में आते जा रहे हैं। लोगों का कहना है कि कुछ साल पहले तक जिस गांव की पहचान सामान्य ग्रामीण जीवन और खेती-किसानी से होती थी, आज वहां नशे के कारोबारियों का दबदबा दिखाई देने लगा है.

स्थानीय निवासियों का आरोप है कि डगमला गांव अब पूरे क्षेत्र में नशीले पदार्थों की सप्लाई का बड़ा ट्रांजिट पॉइंट बन चुका है। यहां से आसपास के गांवों और कस्बों तक प्रतिबंधित दवाओं और इंजेक्शनों की खेप पहुंचाई जा रही है। ग्रामीण बताते हैं कि शाम ढलते ही गांव में संदिग्ध लोगों की आवाजाही बढ़ जाती है और कई युवक खुलेआम नशे की हालत में दिखाई देते हैं।
सबसे चिंता की बात यह है कि इस कारोबार को लेकर गांव में किसी तरह का डर या छिपाव नजर नहीं आता।
ग्रामीणों का दावा है कि पूरे इलाके में यह चर्चा आम है कि दो कथित कारोबारी लंबे समय से इस पूरे नेटवर्क को संचालित कर रहे हैं। आरोप है कि यही लोग थोक और फुटकर दोनों स्तरों पर नशीले इंजेक्शन और प्रतिबंधित कैप्सूलों की सप्लाई कर रहे हैं। गांव के लोग यहां तक कहते हैं कि इन कथित कारोबारियों की पहचान से लेकर उनके ठिकानों तक की जानकारी आम लोगों को है, लेकिन पुलिस अब तक कोई बड़ी कार्रवाई नहीं कर सकी है। यही वजह है कि अब लोगों का गुस्सा सीधे पुलिस प्रशासन पर फूटने लगा है।
ग्रामीणों का कहना है कि जब पूरे गांव को इस अवैध धंधे की जानकारी है, तो फिर पुलिस को इसकी भनक न होना संभव ही नहीं है। लोगों के बीच यह सवाल लगातार उठ रहा है कि आखिर किन कारणों से अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। कई ग्रामीण खुले तौर पर आरोप लगा रहे हैं कि स्थानीय पुलिस की कथित मौन सहमति के कारण ही यह कारोबार लगातार फल-फूल रहा है।
क्षेत्र के बुजुर्गों और अभिभावकों की चिंता सबसे ज्यादा बच्चों और युवाओं को लेकर है। उनका कहना है कि नशे की आसान उपलब्धता ने नई पीढ़ी को तेजी से बर्बादी की ओर धकेल दिया है। गांव के कई परिवारों ने अपने बच्चों के व्यवहार में बदलाव महसूस किया है। कुछ युवाओं ने पढ़ाई छोड़ दी, तो कुछ अपराध और हिंसक गतिविधियों की तरफ बढ़ने लगे हैं। लोगों को डर है कि यदि समय रहते इस नेटवर्क को नहीं तोड़ा गया, तो पूरा क्षेत्र सामाजिक और मानसिक तबाही की चपेट में आ जाएगा। हालांकि इस पूरे मामले पर रामानुजनगर थाना प्रभारी गंगासाय पैकरा का कहना है कि पुलिस को मामले की जानकारी मिल चुकी है और संदिग्ध कारोबारियों की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है।
उन्होंने दावा किया कि जल्द ही पुख्ता सबूतों के आधार पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी और अवैध कारोबारियों को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेजा जाएगा।
थाना प्रभारी के इस बयान के बाद भी लोगों के मन में भरोसे से ज्यादा सवाल हैं। ग्रामीणों का कहना है कि ऐसे आश्वासन पहले भी कई बार दिए गए, लेकिन हालात जस के तस बने रहे। अब पूरे क्षेत्र की निगाह पुलिस की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है। लोग देखना चाहते हैं कि इस बार सचमुच नशे के नेटवर्क पर चोट होगी या फिर यह मामला भी जांच, आश्वासन और कागजी कार्रवाई तक सीमित रह जाएगा। डगमला गांव की यह कहानी सिर्फ एक गांव की समस्या नहीं, बल्कि उस भयावह सच्चाई की तस्वीर है जिसमें ग्रामीण इलाकों तक नशे का जाल तेजी से फैलता जा रहा है। यदि समय रहते इस पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो इसका असर आने वाले वर्षों में पूरे समाज को भुगतना पड़ सकता है।